रांची: फैटी लिवर की समय पर पहचान, रोकथाम और इलाज के लिए रांची में ‘रांची मॉडल’ तैयार किया जा रहा है। इस अभियान के तहत 1.20 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 1,000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और मोबाइल वैन के जरिए 500 स्थानों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
इस अभियान की जानकारी रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने रांची सदर अस्पताल में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत समाज और विकसित भारत की नींव हैं। ‘रांची मॉडल’ में बीमारी के इलाज के साथ उसकी समय पर पहचान और रोकथाम पर भी जोर दिया जाएगा।
डॉ. एसके सरीन के मार्गदर्शन में चलेगा अभियान
अभियान का संचालन वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस. के. सरीन के मार्गदर्शन में सदर अस्पताल रांची और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज (ILBS), नई दिल्ली के सहयोग से किया जाएगा।
इस योजना के तहत दो अत्याधुनिक मोबाइल चिकित्सा वाहन भी तैयार किए गए हैं। दोनों वाहनों की कुल लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई है। ये वाहन रांची पहुंच चुके हैं। इनके जरिए लोगों की फैटी लिवर जांच, जोखिम की पहचान और चिकित्सा परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
चार स्तर पर होगी जांच और इलाज
‘रांची मॉडल’ के तहत गांव से लेकर बड़े अस्पतालों तक चार स्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जाएगी। आशा और एएनएम के माध्यम से शुरुआती जांच की जाएगी। एबीसीडी जोखिम स्कोर से ज्यादा जोखिम वाले लोगों की पहचान होगी।
प्राथमिक स्तर पर लोगों को खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी सलाह दी जाएगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अनुमंडलीय अस्पतालों में फाइब्रोस्कैन, इलाज और मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
एक लाख युवाओं को अभियान से जोड़ने की तैयारी
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में भी अभियान चलाया जाएगा। ‘स्माइल्स’ और ‘वाई-स्माइल्स’ पहल के तहत करीब 40 कॉलेजों के 50 हजार और 60 स्कूलों के 50 हजार विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा।
युवाओं को संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम और समय पर स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूक किया जाएगा।
अभियान के प्रमुख लक्ष्य
- 1.20 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच
- 18 प्रखंड और अनुमंडल स्तरीय क्लीनिक
- 1,000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण
- 500 स्थानों तक मोबाइल वैन पहुंचाना
- करीब 25 हजार उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान
- करीब 20 हजार फैटी लिवर मामलों की प्रारंभिक पहचान
परियोजना की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य फैटी लिवर के मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और मरीजों के लगातार फॉलोअप की व्यवस्था करना है।
प्रेस वार्ता में सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. विमलेश सिंह और डीपीएम प्रवीण सिंह भी मौजूद रहे।




