रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रिश्वत के मामले में दोषी ठहराए गए धनबाद के पूर्व सहायक श्रम आयुक्त अनिल कुमार सिंह को राहत दी है। कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा वर्ष 2016 में सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांगने और लेने के आरोप को पुख्ता सबूतों से साबित नहीं कर पाया। अदालत के मुताबिक, मामले में शिकायतकर्ता की गवाही भी नहीं हुई और अन्य गवाह रिश्वत की मांग तथा रकम लेने की बात स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सके।
2002 में दर्ज हुआ था मामला
मामला वर्ष 2002 का है। आरोप था कि अनिल कुमार सिंह ने बीसीसीएल से जुड़ी ग्रेच्युटी राशि का भुगतान कराने के लिए शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद सीबीआई ने ट्रैप की कार्रवाई की थी।
सीबीआई के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 3,750 रुपये बरामद किए गए थे। बाद में विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन्हें दो और तीन साल की सजा सुनाई थी।
पांच हजार की मांग, ट्रैप में 3,750 रुपये
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस अंतर को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि शिकायत में पांच हजार रुपये की मांग का आरोप था, लेकिन ट्रैप के लिए केवल 3,750 रुपये दिए गए। रिकॉर्ड में यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी कम रकम लेने के लिए तैयार था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। अनिल कुमार सिंह को जमानत बांड से मुक्त करने के साथ उनके जमानतदारों को भी राहत दी गई।




