चैनपुर (गुमला)। प्रखंड की जानावल पंचायत के ग्राम लुपुंगपाठ में बुधवार को सामुदायिक वन पट्टा मिलने की खुशी में वन महोत्सव सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। करीब पांच वर्षों तक चले लंबे संघर्ष और लगातार प्रयासों के बाद गांव को सामुदायिक वन पट्टा मिलने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है।
ग्रामीणों के अनुसार सामुदायिक वन अधिकार के लिए कई बार आवेदन किया गया, लेकिन विभिन्न कारणों से आवेदन निरस्त होते रहे। कई बार आवेदन से संबंधित दस्तावेजों के गायब होने की स्थिति भी सामने आई। इसके बावजूद ग्रामीणों ने प्रयास नहीं छोड़ा। आखिरकार 9 अगस्त को लुपुंगपाठ गांव को सामुदायिक वन पट्टा प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में बेंदोरा पंचायत के मुखिया सुशील दीपक मिंज ने कहा कि झारखंड में पेसा कानून लागू होने से ग्रामीणों को उनके अधिकारों की दिशा में मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि अधिकार मिलने के बाद जंगल की रक्षा और उसका संरक्षण करना ग्रामीणों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
फिया फाउंडेशन के ब्लॉक कॉर्डिनेटर ललित कुमार महतो ने कहा कि चैनपुर में लंबे प्रयास के बाद ग्रामीणों को यह अधिकार मिला है। उन्होंने इस प्रक्रिया में गुमला उपायुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी और जिला कल्याण पदाधिकारी के सहयोग को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि अब पट्टा मिलने के बाद जंगल की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन ग्रामीणों की जिम्मेदारी है।
फिया फाउंडेशन के राज्य प्रमुख ने कहा कि सामुदायिक वन पट्टा मिलना संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों को लगातार सक्रिय रहना होगा।
फिया फाउंडेशन की सौम्या क्रिस्टोफर दास ने ग्रामीणों को प्राकृतिक परिवेश की अहमियत बताते हुए पर्यावरण संरक्षण के साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान पंचायत समन्वयक ऊषा सरिता मिंज ने ग्रामीणों को जंगल की सुरक्षा, संवर्धन और प्रबंधन की शपथ दिलाई। मौके पर एलेक्जेंडर केरकेट्टा, सुनील कुमार, सुमन मंडल, संजय टोप्पो, अमरेंद्र प्रसाद, रजनी केरकेट्टा समेत ग्राम प्रधान, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष टेलेसफोर असुर, मिलियनस असुर सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।



