Spiritual Desk: हिंदू धर्म में अटूट आस्था और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाने वाला महापर्व ‘हरतालिका तीज’ (Hartalika Teej) इस वर्ष 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की पावन स्मृति में रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए तथा कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी परंपरा का पालन करते हुए व्रती महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास रखती हैं।
हरतालिका तीज 2026: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 07:08 बजे होगी और इसका समापन 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का मुख्य पूजन 14 सितंबर को ही संपन्न किया जाएगा।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 06:12 बजे से 07:06 बजे तक (कुल 54 मिनट)
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:27 बजे के बाद
पूजन विधि और आवश्यक सामग्री
व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर हरे या लाल रंग के पारंपरिक वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
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पूजा के लिए साफ बालू, रेत या शुद्ध मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इन्हें चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाकर स्थापित किया जाता है और साथ में कलश स्थापना की जाती है।
शिव-पार्वती को क्या अर्पित करें?
भगवान शिव: बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म, सफेद चंदन और श्वेत वस्त्र।
माता पार्वती: सोलह श्रृंगार सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, चुनरी आदि)।
रात्रि जागरण और पारण के नियम
पूजन के दौरान हरतालिका तीज (Hartalika Teej) की पावन व्रत कथा का श्रवण या पाठ किया जाता है और अंत में आरती की जाती है। इस व्रत में रातभर भजन-कीर्तन और जागरण करने का विशेष महत्व है। अगले दिन सुबह पुनः सामान्य पूजा-अर्चना और दान-दक्षिणा देने के बाद ही व्रत का विधिवत पारण किया जाता है।
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