फॉण्ट कनवर्टर NEW

Advertisement
Advertisement

भारत का इकलौता मंदिर जहां विराजमान हैं बिना सूंड वाले गणेश जी!

India News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित गढ़ गणेश मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं और परंपराओं के कारण भारत में एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां भगवान गणेश का बाल रूप (बिना सूंड

अपनी भाषा में पढ़ें

Advertisement

India News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित गढ़ गणेश मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं और परंपराओं के कारण भारत में एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां भगवान गणेश का बाल रूप (बिना सूंड वाले) स्थापित है, जिसे पुरुषकृति स्वरूप कहा जाता है।

गढ़ गणेश मंदिर की मुख्य विशेषताए

यह भारत का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान गणेश की प्रतिमा बिना सूंड के बाल रूप में स्थापित है। इस अनोखी प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि भक्त अपनी मन्नतें और शुभ कार्यों के निमंत्रण पत्र भगवान गणेश को सीधे चिट्ठी लिखकर भेजते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ये चिट्ठियां मंदिर के पते पर आती हैं, जिन्हें पढ़कर भगवान के चरणों में रखा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस तरह से उनकी हर पुकार गणेश जी तक पहुंचती है।

मंदिर परिसर में दो विशाल मूषक (चूहे) स्थापित हैं। भक्त अपनी समस्याए और इच्छाए इन मूषकों के कानों में बताते हैं, ऐसा माना जाता है कि ये मूषक भक्तों की बात सीधे बप्पा तक पहुंचाते हैं।

इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर शहर बसाने से पहले करवाया था। उन्होंने इसे इस तरह स्थापित करवाया था कि सिटी पैलेस के चंद्र महल से दूरबीन की मदद से भी इसके दर्शन हो सकें।

राजधानी जयपुर में मौजूद मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो साल के 365 दिनों का प्रतीक हैं। यह चढ़ाई थोड़ी मुश्किल हो सकती है, लेकिन ऊपर पहुंचने पर शांति और सुकून का एहसास होता है, साथ ही पूरे जयपुर शहर का खूबसूरत दृश्य भी दिखाई देता है। अगर आप कभी जयपुर जाए, तब इस अद्भुत मंदिर के दर्शन ज़रूर करें। यहां का शांत वातावरण और भक्तों की अटूट आस्था आपको एक अलग ही अनुभव देगी।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram