Patna: बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित कर गन्ना किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-आधारित उद्योगों को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने कदम तेजी से आगे बढ़ा दिए हैं। ‘सात निश्चय-3’ के अंतर्गत “समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार” के संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की तैयारियों को लेकर सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मंत्री ने अधिकारियों को दोनों चीनी मिल परियोजनाओं के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
Read more: बिहार सहकारिता नीति 2026 लागू: सकरी और रैयाम में खुलेंगी नई चीनी मिलें, मंत्री का ऐलान
852.43 करोड़ रुपये की कुल लागत
समीक्षा बैठक में दोनों प्रस्तावित अत्याधुनिक मिलों की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), वित्तीय प्रावधानों, किसान सदस्यता अभियान और इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ प्रस्तावित समझौते की प्रगति का जायजा लिया गया। दोनों नई सहकारी चीनी मिलों की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹852.43 करोड़ तय की गई है। इसमें रैयाम परियोजना पर ₹504.67 करोड़ और सकरी परियोजना पर ₹347.76 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इन मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर एक एकीकृत कृषि-औद्योगिक मॉडल (Integrated Agro-Industrial Model) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, परिवहन और कृषि सेवाओं को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
IPL के साथ 30 साल की लीज और MOU
परियोजना के क्रियान्वयन के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ होने वाले समझौता ज्ञापन (MOU) के प्रारूप को विभागीय मंत्री का अनुमोदन मिल चुका है और इसे अंतिम सहमति के लिए भेजा गया है। इसके साथ ही दोनों मिलों की जमीन को 30 वर्षों की लीज पर IPL को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
Read more: PM मोदी 20 नवंबर को आएंगे बिहार, सकरी-रैयाम चीनी मिल की रखेंगे आधारशिला
27,980 किसानों ने ली सहकारी सदस्यता
सहकारिता मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना की वास्तविक ताकत किसान हैं। रैयाम और सकरी के कमांड एरिया में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों के भारी उत्साह का प्रमाण यह है कि रैयाम क्षेत्र से 12,264 और सकरी क्षेत्र से 15,716 समेत कुल 27,980 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनकी जांच चल रही है।
किसानों को बीज से लेकर लोन तक की सुविधा
प्राथमिक समितियां किसानों से गन्ने की सीधी खरीद के अलावा उन्नत गन्ना बीज, कृषि उपकरण, मिट्टी जांच, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराएंगी। किसानों को सस्ता लोन दिलाने के लिए सहकारी बैंकों के साथ समन्वय बनाया जाएगा और कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए आधुनिक कृषि मशीनरी मुहैया कराई जाएगी।
बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, सहयोग समितियों के निबंधक रजनीश कुमार सिंह और अपर निबंधक (न्यायिक) विकास कुमार बारियार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





