Washington, USA: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक के प्रमाणित तेल भंडार पर नियंत्रण मिल गया है। ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील’ करार दिया है। 65 अरब बैरल कच्चे तेल का यह पैमाना कितना विशाल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे भारत जैसे बड़े देश की मौजूदा तेल खपत की जरूरतें करीब 32 साल तक पूरी की जा सकती हैं। ट्रंप के मुताबिक, इस ऐतिहासिक समझौते के बाद अमेरिका का तेल भंडार दोगुने से भी अधिक हो जाएगा, जिससे भविष्य में अमेरिकी नागरिकों के लिए पेट्रोल और ईंधन की कीमतों को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस महाडील की सफलता का श्रेय अपने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को दिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस समझौते में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज और निजी क्षेत्र की कई कंपनियां शामिल हैं, जिनमें प्रमुख अमेरिकी तेल कंपनियां भी भागीदारी कर सकती हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि इस पूरे सौदे को अमलीजामा पहनाने में अमेरिकी करदाताओं (टैक्सपेयर्स) की जेब से एक भी पैसा खर्च नहीं होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर मजबूत करने वाला कदम बताया है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस समझौते को दोनों देशों की जनता के लिए एक बड़ी जीत करार दिया। रुबियो का कहना है कि इस डील के जरिए वेनेजुएला में लगभग 100 अरब डॉलर का भारी निजी निवेश आ सकता है। इससे वहां हजारों की संख्या में नए रोजगार पैदा होंगे और लंबे समय से खस्ताहाल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण संभव हो सकेगा। हालांकि, इस निजी साझेदारी में कौन-कौन सी कंपनियां शामिल की गई हैं और समझौते की बाकी बारीक शर्तें क्या हैं, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक मौजूद है। सरकारी व अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, वहां की जमीन के नीचे लगभग 303 अरब बैरल कच्चा तेल दबा हुआ है, जो पूरी दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17 प्रतिशत बैठता है। लेकिन सबसे बड़ा विरोधाभास यह रहा है कि इतना बड़ा खजाना होने के बावजूद वैश्विक तेल उत्पादन में वेनेजुएला की हिस्सेदारी सिर्फ एक फीसदी के आसपास ही सिमट कर रह गई थी। इसकी मुख्य वजह वहां का जर्जर, पुराना और खराब बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) है। यानी जमीन में तेल की मौजूदगी और लोकेशन स्पष्ट होने के बाद भी उसे निकालने और रिफाइन करने की क्षमता वहां ठप पड़ी थी, जिसे अमेरिका अब फिर से चालू करने की तैयारी में है।
वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से ही वाशिंगटन और वेनेजुएला की नई सरकार के बीच तेल संसाधनों को लेकर बातचीत काफी तेज हो गई थी। ट्रंप पहले ही अमेरिकी कंपनियों से वहां लौटने की अपील कर चुके थे। इस पूरी व्यवस्था में डेल्सी रोड्रिगेज की भूमिका बेहद अहम रही है, जो पूर्व में मादुरो सरकार के तहत पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन मंत्री रह चुकी हैं और अब अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर अमेरिका के साथ इस नए समझौते को आगे बढ़ा रही हैं।





