रामगढ़। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत और राज्य गठन आंदोलन के महानायक ‘दिशोम गुरु’ स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर 4 अगस्त 2026 को उनकी जन्मस्थली रामगढ़ जिले के नेमरा में एक भव्य एवं भावुक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विकास मेला-सह-पारितोषिक वितरण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी धर्मपत्नी व विधायक कल्पना सोरेन, माता रूपी सोरेन और समस्त परिजनों के साथ भाग लिया। मुख्यमंत्री ने बरलंगा स्थित सोना सोबरन +2 उच्च विद्यालय (लुकैयाटांड़) परिसर में अपने पूज्य पिता दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान क्षेत्र की जनता को 105.2 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का तोहफा भी दिया गया।
एक पुत्र और राज्य के मुखिया के रूप में भावुक हुए मुख्यमंत्री
प्रतिमा अनावरण के दौरान अपने पिता के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन काफी भावुक हो गए। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड प्रदेश, देश के आदिवासियों, दलितों, शोषितों और पिछड़े समाज के लिए अत्यंत भारी और भावुक कर देने वाला क्षण है। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने अपनी जिंदगी का हर लम्हा इस माटी, जल-जंगल-जमीन और दबे-कुचले लोगों के अधिकारों की रक्षा में न्योछावर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कालचक्र के विधान के तहत जो इस धरा पर आता है, उसे प्रकृति में लीन होना ही पड़ता है। पिछले वर्ष आज ही के दिन आदरणीय बाबा हमें छोड़कर चले गए थे, लेकिन उनकी विचारधारा, उनका जुझारू व्यक्तित्व और उनका संघर्ष आज भी राज्य के हर नागरिक के दिल में जीवित है। लुकैयाटांड़ में स्थापित यह आदमकद प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास, अपनी जड़ों और शहीदों के बलिदान की याद दिलाती रहेगी।
‘समाज की असली ताकत एकजुटता, भटकाव से बचें युवा’
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्वजों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनके दादा अमर शहीद सोबरन मांझी ने समाज को शिक्षित करने के लिए रामगढ़ के एक छोटे से स्कूल में शिक्षक के रूप में सेवा दी थी। हालांकि, महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के कारण असामाजिक तत्वों ने उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। हेमंत सोरेन ने चिंता जताते हुए आगाह किया कि आज भी वे असामाजिक तत्व नए रूपों और नए चेहरों में समाज के भीतर मौजूद हैं, जो सीधे-सादे ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस समस्या का एकमात्र स्थाई समाधान हमारी अटूट एकजुटता, आपसी भाईचारा और सम्मान का भाव है। नई पीढ़ी और युवाओं को सही दिशा दिखाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है, ताकि हमारी युवा ऊर्जा किसी भटकाव का शिकार न हो।
राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर जननायक बने दिशोम गुरु
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राज्य के हर जिले और गांव में लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स्वतःस्फूर्त तरीके से गुरुजी को नमन कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे राजनीति के पारंपरिक बंधनों से ऊपर उठकर एक महान जननायक बने। पद, प्रतिष्ठा और मंत्री-विधायक जैसे पद उनके संघर्ष के आगे बहुत छोटे थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वजों ने जिस खून-पसीने से सींचकर अलग झारखंड राज्य का सपना साकार किया, उसे सजाने-संवारने और अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुंचाने का काम वर्तमान सरकार पूरी निष्ठा के साथ कर रही है। झारखंड वीरों और महापुरुषों की पावन धरती है-भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, निर्मल महतो, विनोद बिहारी महतो और दिशोम गुरु जैसे अमर नायकों के दिखाए रास्ते पर चलकर ही हम एक समतामूलक और समृद्ध झारखंड का निर्माण कर सकते हैं।
कई गणमान्य जन रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्य सरकार के मंत्री राधा कृष्ण किशोर, संजय प्रसाद यादव, दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद, शिल्पी नेहा तिर्की, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक उमाकांत रजक, कुमार जयमंगल सिंह, अमित महतो, ममता देवी, पूर्व मंत्री बेबी देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित शासन-प्रशासन के वरीय अधिकारी और हजारों की संख्या में आमजन उपस्थित रहे।




