रांची: राज्य के शिक्षित एवं पात्र बेरोजगार युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘आय वृद्धि योजना’ के सुचारू रूप से लागू न होने को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। सोमवार को इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि युवाओं के कल्याण के लिए बनी यह महत्वपूर्ण योजना ज़मीन पर प्रभावी ढंग से क्यों लागू नहीं हो पा रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ताओं ने अदालत को अवगत कराया कि वर्ष 2023 के बाद से रांची जिले के कई पात्र बेरोजगार युवाओं को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल सका है। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2023 और 2024 में योजना के लिए आवंटित की गई बजटीय राशि का उपयोग ही नहीं किया गया और प्रशासनिक सुस्ती के कारण वह राशि वापस लौट गई।
अदालत को यह भी बताया गया कि जब प्रभावित युवाओं ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, तो पता चला कि जिला कल्याण पदाधिकारी (DWO) द्वारा योग्य लाभार्थियों की सूची सत्यापन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को काफी पहले भेजी जा चुकी है। हालांकि, लंबे समय से अंतिम स्वीकृत सूची वापस न आने के कारण पूरी प्रक्रिया अटकी हुई है और पात्र युवा लाभ से वंचित हैं।
उल्लेखनीय है कि ‘आय वृद्धि योजना’ की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। इसके बावजूद, रांची जिले में योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने में गंभीर लापरवाही देखने को मिल रही है।
उच्च न्यायालय ने इस विषय पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को चार सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने का समय दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकार अपने जवाब में यह अनिवार्य रूप से बताए कि योजना के संचालन में आ रही रुकावटों को दूर करने और इसे गति देने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 1 अक्तूबर की तिथि तय की है।





