Career Adda: मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के लिए एमबीबीएस ही एकमात्र विकल्प नहीं है। अगर आप चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ना चाहते हैं और एमबीबीएस नहीं कर सकते, तो कई शॉर्ट टर्म मेडिकल कोर्स आपके लिए विकल्प बन सकते हैं। छह महीने से दो साल तक के इन कोर्स में मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
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मेडिकल क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण लैब टेक्नोलॉजी, डायलिसिस, नर्सिंग असिस्टेंट और रेडियोलॉजी जैसे क्षेत्रों में करियर के विकल्प मौजूद हैं। आइए ऐसे ही पांच मेडिकल कोर्स के बारे में जानते हैं।
सर्टिफिकेट इन फर्स्ट एड
सर्टिफिकेट इन फर्स्ट एड छह महीने का बुनियादी मेडिकल कोर्स है। इसमें आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार देने का प्रशिक्षण दिया जाता है। दुर्घटना, चोट लगने या अचानक बीमार पड़ने की स्थिति में डॉक्टर तक पहुंचने से पहले किस तरह प्राथमिक सहायता दी जाए, यह इस कोर्स में सिखाया जाता है। रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं और कई सरकारी संस्थान इससे जुड़े कोर्स कराते हैं।
मेडिकल लैब और डायलिसिस टेक्नोलॉजी
डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी दो साल का कोर्स है। लैब और टेस्टिंग में रुचि रखने वालों के लिए यह एक विकल्प हो सकता है। इसमें खून, पेशाब और अन्य शारीरिक नमूनों की जांच से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। मेडिकल जांच और इलाज में लैब रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इस कोर्स के बाद मेडिकल लैब से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है।
डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नोलॉजी की अवधि एक से दो साल होती है। इसमें स्टूडेंट्स को डायलिसिस मशीन ऑपरेट करने और मरीजों की देखभाल से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। किडनी रोगों के बढ़ते मामलों के कारण डायलिसिस टेक्नीशियन की मांग बढ़ी है। कोर्स पूरा करने के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
नर्सिंग असिस्टेंट के रूप में करियर
सर्टिफिकेट इन नर्सिंग असिस्टेंट एक साल का कोर्स है। इसमें मरीजों की बुनियादी देखभाल, इंजेक्शन लगाने, बैंडेज करने और डॉक्टर की सहायता से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। यह कोर्स उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकता है, जो सेवा भाव के साथ चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ना चाहते हैं। इसके बाद नर्सिंग असिस्टेंट से जुड़ी नौकरियों के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
रेडियोलॉजी और एक्स-रे टेक्नोलॉजी
डिप्लोमा इन रेडियोलॉजी/एक्स-रे टेक्नोलॉजी दो साल का मेडिकल कोर्स है। इसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे डायग्नॉस्टिक टूल्स से जुड़े काम का प्रशिक्षण दिया जाता है। आधुनिक चिकित्सा में डायग्नॉस्टिक जांच की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह कोर्स रेडियोलॉजी विभाग में टेक्नीशियन के रूप में काम करने के लिए जरूरी कौशल विकसित करने में मदद कर सकता है। छोटे क्लीनिक से लेकर बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों तक रेडियोलॉजी और एक्स-रे टेक्नीशियन की जरूरत रहती है।
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मेडिकल डिप्लोमा कोर्स में करियर का स्कोप
इन शॉर्ट टर्म मेडिकल कोर्स के जरिए हेल्थकेयर सेक्टर की अलग-अलग भूमिकाओं के लिए जरूरी प्रशिक्षण हासिल किया जा सकता है। लैब टेक्नोलॉजी, डायलिसिस, नर्सिंग असिस्टेंट और रेडियोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ क्लीनिक और डायग्नॉस्टिक सेंटर में भी रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं। कोर्स का चयन अपनी रुचि और मेडिकल क्षेत्र में किस तरह का काम करना चाहते हैं, इसे ध्यान में रखकर किया जा सकता है।




