Spirituality Desk: भगवान शिव के मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी बैल जरूर दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है। नंदी भगवान शिव के वाहन होने के साथ उनके प्रिय गण और मित्र भी माने जाते हैं। इसे लेकर पुराणों में एक कथा का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, शिलाद नाम के एक ऋषि थे। उन्होंने लंबे समय तक भगवान शिव की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें नंदी के रूप में पुत्र दिया।
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संतों ने नंदी को बताया था अल्पायु
शिलाद ऋषि एक आश्रम में रहते थे और उनके पुत्र नंदी भी वहीं ज्ञान प्राप्त करते थे। एक समय उनके आश्रम में मित्र और वरुण नामक दो संत आए। शिलाद ऋषि ने दोनों संतों की सेवा की जिम्मेदारी नंदी को सौंपी। नंदी ने पूरी श्रद्धा से दोनों संतों की सेवा की। आश्रम से विदा होते समय संतों ने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया, लेकिन नंदी को ऐसा आशीर्वाद नहीं दिया। इस बात ने शिलाद ऋषि को परेशान कर दिया। उन्होंने संतों से इसका कारण पूछा। पहले तो दोनों संत सोच में पड़ गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु हैं। यह सुनकर शिलाद ऋषि बेहद चिंतित हो गए। पुत्र की अल्पायु की बात उनके मन में लगातार बनी रही और वे परेशान रहने लगे।
पिता की चिंता देख नंदी ने कही ये बात
एक दिन पिता को परेशान देखकर नंदी ने उनसे चिंता का कारण पूछा। शिलाद ऋषि ने बताया कि संतों के अनुसार वह अल्पायु हैं और इसी कारण उनका मन चिंतित है। पिता की बात सुनकर नंदी जोर से हंसने लगे। उन्होंने कहा, ‘भगवान शिव ने मुझे आपको दिया है। ऐसे में मेरी रक्षा करना भी उनकी ही जिम्मेदारी है, इसलिए आप परेशान न हों।’ पिता को शांत करने के बाद नंदी भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गए। उन्होंने दिन-रात भगवान शिव की तपस्या की।
नंदी की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव
नंदी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी इच्छा पूछी। इस पर नंदी ने कहा कि वह जीवनभर भगवान शिव के सानिध्य में रहना चाहते हैं। नंदी की इच्छा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गले लगा लिया। शिवजी ने नंदी को बैल का चेहरा दिया और उन्हें अपना वाहन, मित्र और अपने गणों में सबसे उत्तम रूप में स्वीकार कर लिया।
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शिवलिंग के सामने क्यों विराजमान होते हैं नंदी?
इस पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव द्वारा नंदी को अपना वाहन, मित्र और गण स्वीकार किए जाने के बाद शिव मंदिरों में नंदी के बैल रूप को स्थापित करने की परंपरा शुरू हुई। यही कारण माना जाता है कि शिव मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी विराजमान रहते हैं और धार्मिक मान्यता में नंदी के बिना शिवलिंग को अधूरा माना जाता है।
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