New Delhi: भारत में पुरुषों में इनफर्टिलिटी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और अब बड़ी संख्या में पुरुष जांच व इलाज के लिए आगे आ रहे हैं। फर्टिलिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलती जीवनशैली, तनाव और देर से परिवार शुरू करने जैसे कई कारण पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी बीच देश में आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेवाओं का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब 40 से 50 प्रतिशत इनफर्टिलिटी मामलों में पुरुषों से जुड़े कारण अकेले या महिला से जुड़े कारणों के साथ शामिल हो सकते हैं। बढ़ती जांच और जागरूकता को देखते हुए फर्टिलिटी क्लीनिक भी पुरुषों के लिए जांच और उपचार सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं।
पांच साल में मामलों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा
कोलकाता के एक आईवीएफ फर्टिलिटी सेंटर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में उसके यहां पुरुष इनफर्टिलिटी से जुड़े मामलों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जांच कराने वाले पुरुषों में सबसे अधिक संख्या 30 से 35 वर्ष की उम्र वालों की बताई गई है। एक आईवीएफ सेंटर की चेयरपर्सन के अनुसार, पहले चार में से एक दंपती में पुरुष से जुड़े कारण सामने आते थे, जबकि अब यह आंकड़ा करीब तीन में से एक तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे जागरूकता बढ़ने के साथ स्पर्म की संख्या, गति और बनावट में बदलाव से भी जोड़ा है।
भारत में 1.4 अरब डॉलर का IVF बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आईवीएफ बाजार करीब 1.4 अरब डॉलर का है और देशभर में 2,000 से अधिक आईवीएफ क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में हर साल लगभग 2 लाख से 2.5 लाख आईवीएफ साइकिल किए जाने का दावा किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या करीब 4 लाख साइकिल सालाना तक पहुंच सकती है। इस विस्तार में महानगरों के साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
पुरुष फर्टिलिटी जांच और इलाज पर बढ़ रहा खर्च
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, कई छोटे और मध्यम आईवीएफ सेंटरों की कुल आय का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा पुरुष फर्टिलिटी से जुड़ी जांच, परामर्श और उपचार से आता है। दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर के अधिकारी के मुताबिक, आईसीएसआई जैसी एडवांस तकनीक के एक साइकिल पर करीब 1.2 लाख से 2.5 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। शुरुआती परामर्श और जांच का खर्च भी 20 हजार रुपये या उससे अधिक हो सकता है।
पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं ये कारक
विशेषज्ञों ने मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान, लगातार तनाव, अपर्याप्त नींद और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतों को पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल किया है। रिपोर्ट में लैपटॉप को लंबे समय तक गोद में रखकर काम करने और टेस्टिकल्स के आसपास लगातार अधिक तापमान रहने को भी संभावित जोखिम से जोड़ा गया है। प्लास्टिक, कीटनाशकों, फूड पैकेजिंग और औद्योगिक प्रदूषण में मौजूद कुछ रसायनों के हार्मोन पर संभावित प्रभाव की भी चर्चा की गई है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एनाबॉलिक स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी पुरुष प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों की प्रजनन क्षमता में भी बदलाव आ सकता है, हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में समान नहीं होता।
छोटे शहरों में भी बढ़ रही फर्टिलिटी जांच
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों के अलावा वाराणसी, गोरखपुर और भोपाल जैसे शहरों में भी पुरुष फर्टिलिटी जांच की मांग बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इनफर्टिलिटी को केवल महिला या पुरुष की समस्या मानने के बजाय दंपती से जुड़ी स्थिति के रूप में देखना चाहिए। जांच और उपचार में दोनों की स्थिति का आकलन जरूरी होता है।




