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सरोगेसी केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा– मां-बाप बनने का अधिकार सरकार तय नहीं करेगी

India News: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सरोगेसी (नियमन) कानून 2021 की उम्र सीमा संबंधी बाध्यता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने सीधे-साफ कहा कि माता-पिता बनने का अधिकार सरकार या कोई कानून तय नहीं कर सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की निजता, स्वतंत्रता और

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India News: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सरोगेसी (नियमन) कानून 2021 की उम्र सीमा संबंधी बाध्यता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने सीधे-साफ कहा कि माता-पिता बनने का अधिकार सरकार या कोई कानून तय नहीं कर सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की निजता, स्वतंत्रता और प्राकृतिक अधिकार का विषय है। यदि किसी दंपति ने 2022 से पहले भ्रूण फ्रीज करा लिया है, तो उन पर नई उम्र सीमा का नियम लागू नहीं होगा।

कोर्ट ने इस फैसले में चार अहम बिंदुओं को स्पष्ट किया:

  • कानून बनने से पहले के मामलों पर नई शर्तें लागू नहीं होंगी

  • 2022 से पहले भ्रूण फ्रीज कराने वालों को सरोगेसी का अधिकार सुरक्षित रहेगा

  • सरोगेसी प्रक्रिया भ्रूण फ्रीज के क्षण से शुरू मानी जाएगी

  • भ्रूण फ्रीजिंग के बाद दंपति का योगदान पूरा मान लिया जाता है, बाकी प्रक्रिया सरोगेट मां पर निर्भर करती है

यह फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने सरकार के तर्कों और उम्र सीमा के आधार पर अधिकार सीमित करने के प्रयासों को फटकारते हुए कहा कि “बढ़ती उम्र को चिंता का कारण बताकर प्रजनन अधिकारों पर अंकुश लगाना उचित नहीं।”

मूल मामला चेन्नई के इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. अरुण मुथुवेल की याचिका से जुड़ा था, जिसमें कमर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध और उम्र सीमा की बाध्यता को चुनौती दी गई थी। अदालत ने इन तर्कों की सुनवाई में दो टूक कहा कि प्रजनन निर्णय व्यक्ति की निजता में आता है और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

सरकार ने तर्क दिया था कि अधिक उम्र में माता-पिता बच्चों की परवरिश ठीक से नहीं कर पाएंगे। कोर्ट ने इसे भी खारिज किया और स्पष्ट किया कि किसी की उम्र के आधार पर उसके मातृत्व या पितृत्व अधिकार को सीमित करना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।

इस ऐतिहासिक फैसले से देशभर में उन दंपतियों को राहत मिली है, जिन्होंने सरोगेसी प्रक्रिया में कदम रखा था और उम्र की बंदिश के चलते चिंता में थे। कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से उन्हें कानूनी सुरक्षा मिल गई है।

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