Health Desk: कम वसा वाला भोजन ही हमेशा बेहतर होता है, इस धारणा को एक बड़े अध्ययन के नतीजे चुनौती देते हैं। पांच महाद्वीपों के करीब 1.35 लाख लोगों पर किए गए अध्ययन में अधिक कार्बोहाइड्रेट सेवन को मृत्यु के अधिक जोखिम से जोड़ा गया, जबकि वसा के अधिक सेवन के साथ मृत्यु का जोखिम कम पाए जाने का संबंध सामने आया। हालांकि अध्ययन के आधार पर ज्यादा वसा खाने को लंबी उम्र की गारंटी नहीं माना जा सकता।
1.35 लाख लोगों पर किया गया अध्ययन
इस शोध में पांच महाद्वीपों के करीब 1,35,000 लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने उनके आहार में वसा और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा तथा मृत्यु के जोखिम के बीच संबंध का अध्ययन किया। अध्ययन में ऊर्जा का करीब 60 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट से लेने वालों में मृत्यु का जोखिम अधिक होने का संबंध सामने आया।
वसा को लेकर क्या सामने आया?
अध्ययन में वसा से करीब 35 प्रतिशत ऊर्जा लेने वालों में मृत्यु का जोखिम कम पाए जाने का संबंध सामने आया। ये नतीजे उस धारणा से अलग थे, जिसमें बेहतर स्वास्थ्य के लिए आहार में वसा को बहुत कम रखने पर जोर दिया जाता रहा है। हालांकि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पनीर, मक्खन या अन्य अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ जितनी ज्यादा मात्रा में खाए जाएं, उतना ही स्वास्थ्य बेहतर होगा।
ज्यादा कार्बोहाइड्रेट पर भी ध्यान जरूरी
अध्ययन में कहा गया कि वसा की मात्रा बहुत कम करने पर उसकी जगह कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया, जहां आहार में कार्बोहाइड्रेट की हिस्सेदारी अधिक हो सकती है। अध्ययन में अधिक कार्बोहाइड्रेट सेवन और मृत्यु के जोखिम के बीच संबंध मिला, लेकिन केवल इसी आधार पर कार्बोहाइड्रेट को मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना जा सकता।
संतुलित आहार पर ध्यान जरूरी
अध्ययन के निष्कर्ष वसा को पूरी तरह कम करने के बजाय आहार की समग्र गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत की ओर संकेत करते हैं। वसा और कार्बोहाइड्रेट दोनों शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व हैं, लेकिन उनका स्रोत और मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अध्ययन को अधिक मक्खन या पनीर खाने की सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली और स्वास्थ्य के अनुसार आहार की जरूरत अलग हो सकती है।





