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16 साल की खोज: कांगो के जंगलों में मिला नारंगी होंठों वाला दुर्लभ बंदर!

वैज्ञानिकों ने अफ्रीका के कांगो जंगलों में नारंगी होंठों वाले दुर्लभ 'लिक्वेली' बंदर की खोज की है। 16 साल के शोध और डीएनए जांच के बाद इसे नई प्रजाति माना गया है।

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London, UK: अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के घने जंगलों में वैज्ञानिकों ने नारंगी होंठों वाले एक बिल्कुल नए बंदर की प्रजाति की पहचान की है। स्थानीय स्तर पर इसे ‘लिक्वेली’ नाम दिया गया है, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम अंगोलन कोलोबस है। एक नई स्टडी में इस खोज की जानकारी दी गई है। पिछले 75 सालों में अफ्रीका में पाई जाने वाली यह सिर्फ पांचवीं नई बंदर प्रजाति है, जिसे वन्यजीव अनुसंधान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

16 साल के कड़े शोध के बाद हुई पुष्टि

वैज्ञानिकों ने 16 सालों तक इस बंदर की शारीरिक बनावट, आवाज, रहने के तरीके और डीएनए की गहन जांच की। इसके बाद यह पुष्टि हुई कि यह पहले से ज्ञात किसी भी प्रजाति से अलग है। इस बंदर की पहली धुंधली तस्वीर 2008 में ली गई थी, लेकिन इसके बाद करीब 10 सालों तक यह दोबारा नजर नहीं आया। लोमामी नेशनल पार्क में रिसर्च शुरू होने के बाद यह बंदर फिर दिखाई दिया, जिसके बाद लगातार अध्ययन किया गया। रिसर्च टीम ने आसपास के 52 गांवों का दौरा किया, जिनमें से केवल 8 गांवों के लोगों ने ही इसे पहचानने की बात कही। इससे साफ है कि यह बंदर बेहद सीमित इलाके में रहता है।

नारंगी होंठ और अनोखी शारीरिक बनावट

लिक्वेली, कोलोबस परिवार का सदस्य होने के बावजूद अपनी अलग पहचान रखता है। इसके होंठों के आसपास नारंगी और हल्के क्रीम रंग का हिस्सा होता है, जबकि शरीर के पिछले हिस्से पर सफेद रंग का पैच पाया जाता है। इसके बाल और आवाज भी दूसरे कोलोबस बंदरों से अलग हैं। डीएनए जांच से पता चला है कि इसका सबसे करीबी रिश्ता ब्लैक कोलोबस से है, लेकिन ये दोनों प्रजातियां लगभग 50 लाख साल पहले ही एक-दूसरे से अलग हो चुकी थीं।

अवैध शिकार और सिकुड़ते जंगल से खतरे में अस्तित्व

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बंदर सिर्फ 1700 वर्ग किलोमीटर के बेहद छोटे इलाके में ही पाया जाता है, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। रिसर्च के दौरान अवैध शिकार, जंगलों की कटाई और बढ़ती खेती के कारण इसके प्राकृतिक आवास सिकुड़ने के सबूत मिले हैं। शोधकर्ताओं ने अंगोलन कोलोबस को लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इसके आवास को सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह नई प्रजाति विलुप्त हो सकती है।

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