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खुले में मांस बिक्री पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, स्लॉटर हाउस नियमावली पर सरकार को मिला 1 माह का समय

रांची: राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में दुकानों के बाहर खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन के प्रदर्शन और बिक्री के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष

हाईकोर्ट
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रांची: राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड में दुकानों के बाहर खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन के प्रदर्शन और बिक्री के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि राज्यभर में स्लॉटर हाउस (वधशाला) के संचालन और प्रबंधन के लिए ‘रूल्स एंड रेगुलेशंस’ (नियमावली) तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार ने पीठ को बताया कि नियमावली का मसौदा (Draft) तैयार कर अग्रिम प्रक्रिया के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया है। वित्त विभाग से हरी झंडी मिलते ही इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने इस पूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए अदालत से एक महीने का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया।

खंडपीठ ने राज्य सरकार के तर्कों और स्थिति की समीक्षा करने के बाद याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया है कि अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा नियमावली के गठन और लागू करने की दिशा में की गई वास्तविक प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि यह पूरी कार्रवाई याचिकाकर्ता श्यामानंद पांडेय द्वारा दायर जनहित याचिका पर की जा रही है। याचिका में यह गंभीर मुद्दा उठाया गया है कि रांची समेत राज्य के विभिन्न छोटे-बड़े शहरों में मीट विक्रेता दुकानों के बाहर खुले मैदान, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कटे हुए बकरे और मुर्गों को लटकाकर बेचते हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, खुले में इस तरह मांस का प्रदर्शन न केवल खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSA) के विपरीत है, बल्कि यह स्वच्छता के बुनियादी मानकों और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। खुले में टांगे गए मांस पर मक्खियाँ और धूल बैठती है, साथ ही सार्वजनिक रास्तों व स्कूलों के आसपास इसका प्रदर्शन बच्चों और नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यह स्थिति सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों का सीधे तौर पर उल्लंघन है। याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार तत्काल प्रभाव से स्लॉटर हाउस और मांस बिक्री से जुड़े कड़े नियम लागू करे और खुले में मांस के प्रदर्शन एवं अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाए।

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