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दहेज की वेदी पर चढ़ी नवविवाहिता: रक्षक ही बना भक्षक, फरार दरोगा संतोष यादव रांची से गिरफ्तार

बोकारो/रांची: झारखंड पुलिस की साख एक बार फिर उस वक्त तार-तार हो गई, जब कानून का रखवाला ही एक बेकसूर महिला की मौत का मुख्य गुनहगार बनकर सामने आया। बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र (तेनुघाट ओपी) के अंतर्गत आने वाले घरवाटांड़ गांव में एक

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बोकारो/रांची: झारखंड पुलिस की साख एक बार फिर उस वक्त तार-तार हो गई, जब कानून का रखवाला ही एक बेकसूर महिला की मौत का मुख्य गुनहगार बनकर सामने आया। बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र (तेनुघाट ओपी) के अंतर्गत आने वाले घरवाटांड़ गांव में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के महज कुछ ही दिनों बाद एक नवविवाहिता पिंकी कुमारी को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस पूरे सनसनीखेज मामले का मुख्य आरोपी कोई और नहीं, बल्कि खुद पुलिस महकमे का सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) संतोष यादव है। आरोपी दरोगा पर अपनी ही पत्नी को दहेज के लिए इस कदर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है कि मजबूर होकर पिंकी को मौत का रास्ता चुनना पड़ा। इस घटना ने समाज और पुलिस प्रशासन दोनों को झकझोर कर रख दिया है।

शादी के महज दो महीने में ही शुरू हुआ जुल्म का सिलसिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका पिंकी कुमारी की शादी इसी वर्ष 29 अप्रैल को दरोगा संतोष यादव के साथ बड़े ही धूमधाम से हुई थी। मायके वालों ने अपनी हैसियत के मुताबिक शादी में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन लालच की कोई सीमा नहीं होती। शादी के कुछ ही दिन बीते थे कि दरोगा संतोष यादव और उसके परिवार वालों का असली रंग सामने आने लगा। पिंकी के परिजनों का आरोप है कि शादी के तुरंत बाद से ही संतोष यादव, उसकी मां (सास), पिता (ससुर) और भैंसुर मिलकर पिंकी पर अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाने लगे थे।

कहा जा रहा है कि एक सब-इंस्पेक्टर के पद पर होने के घमंड में चूर संतोष यादव अपनी पत्नी को लगातार कम दहेज मिलने का ताना देता था। मृतका के भाई सुधीर यादव द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, जुल्म का यह सिलसिला सिर्फ मानसिक प्रताड़ना तक ही सीमित नहीं था। बीते 23 जून को जब पिंकी अपने ससुराल गई थी, तब उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने उसे जान से मारने की भी कोशिश की। ससुराल वालों के इस हिंसक और क्रूर व्यवहार से पिंकी बेहद डरी हुई और गहरे मानसिक अवसाद में चली गई थी।

संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी मिली लाश, फूटा परिजनों का गुस्सा

ससुराल वालों की रोज-रोज की प्रताड़ना और प्रताड़ित करने के हिंसक तौर-तरीकों का नतीजा यह हुआ कि 26 जून को पिंकी कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका शव फंदे से लटकता हुआ पाया गया। मायके वालों का साफ तौर पर कहना है कि यह सीधे तौर पर दहेज हत्या का मामला है, जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है। अगर यह आत्महत्या भी है, तो इसके लिए पूरी तरह से दरोगा संतोष यादव का लगातार किया जा रहा उत्पीड़न और उकसाना ही जिम्मेदार है।

इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। 27 जून को मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इंसाफ की मांग को लेकर आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने गोमिया चौक को चारों तरफ से घेर लिया और घंटों तक चक्का जाम रखा। सड़क पर उतरे लोगों का एक ही नारा था—“दहेज लोभी दरोगा संतोष यादव को तुरंत गिरफ्तार करो।” इस प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। मामले की गंभीरता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP) ने तुरंत एक्शन लिया और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। तब कहीं जाकर वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर जाम हटाया जा सका।

पुलिस से छिपता फिर रहा था कानून का रखवाला, वीडियो बनाकर रची सहानुभूति की साजिश

गोमिया थाने में मामला दर्ज होते ही खुद को कानून से ऊपर समझने वाला दरोगा संतोष यादव अपनी वर्दी की धौंस भूलकर फरार हो गया। जो पुलिसवाला कल तक अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजता था, वह खुद एक अपराधी की तरह अपनी लोकेशन बदल-बदल कर जंगलों और शहरों में छिपता फिर रहा था।

अपनी गर्दन फंसती देख शातिर आरोपी संतोष यादव ने आत्मसमर्पण करने से ठीक पहले एक वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में उसने खुद को पाक-साफ दिखाने और कानून की आंखों में धूल झोंकने की नाकाम कोशिश की। उसने अपने ससुराल वालों पर ही पलटवार करते हुए उन पर अपनी पत्नी की हत्या का मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिया। आरोपी ने दलील दी कि उसने शादी के 15 दिनों के भीतर अपनी पत्नी के खाते में ऑनलाइन माध्यम से 5-6 लाख रुपये भेजे थे, इसलिए दहेज का कोई विवाद ही नहीं था। हालांकि, कानूनी जानकारों और पुलिस का मानना है कि यह केवल कोर्ट और जांच एजेंसी को गुमराह करने तथा अपनी छवि बचाने के लिए चली गई एक सोची-समझी चाल थी। पैसे ट्रांसफर करने का यह कतई मतलब नहीं है कि उसके बाद महिला को प्रताड़ित नहीं किया गया या अन्य चीजों की मांग नहीं की गई।

ओरमांझी से दबोचा गया आरोपी दरोगा, भेजा गया जेल

दरोगा संतोष यादव का यह ‘वीडियो ड्रामा’ ज्यादा देर काम नहीं आ सका। बोकारो पुलिस की तकनीकी सेल (Technical Cell) और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस लगातार उसके पीछे लगी हुई थी। आखिरकार पुलिस को सटीक सूचना मिली कि आरोपी दरोगा रांची के ओरमांझी इलाके में छिपा हुआ है। बोकारो पुलिस ने बिना वक्त गंवाए ओरमांझी में तगड़ी घेराबंदी की और फरार चल रहे आरोपी सब-इंस्पेक्टर संतोष यादव को धर दबोचा।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे बोकारो ले आई, जहां आवश्यक पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर आरोपी दरोगा को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या खाकी वर्दी पहनने वाला कोई अधिकारी। इस मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि पीड़िता पिंकी कुमारी को न्याय मिल सके और समाज में यह कड़ा संदेश जाए कि दहेज जैसी कुप्रथा और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

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