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झारखंड में बदला आतंकवाद से लड़ने का सिस्टम; सीआईडी के अधीन हुआ एटीएस

रांची: झारखंड में आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ चल रही जंग में राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा और दूरगामी प्रशासनिक बदलाव किया है। देश विरोधी गतिविधियों, आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टरों पर नकेल कसने के लिए गठित ‘आतंकवाद निरोधी दस्ता’ (ATS) अब

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रांची: झारखंड में आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ चल रही जंग में राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा और दूरगामी प्रशासनिक बदलाव किया है। देश विरोधी गतिविधियों, आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टरों पर नकेल कसने के लिए गठित ‘आतंकवाद निरोधी दस्ता’ (ATS) अब स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि राज्य के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन काम करेगा। झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने बुधवार को इस संबंध में एक आधिकारिक और हाई-प्रोफाइल आदेश जारी कर दिया है।

डीजीपी द्वारा जारी किए गए नए आदेश के तहत, एटीएस को लेकर पूर्व में जारी किए गए सभी पुराने निर्देशों और व्यवस्थाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त (कैंसिल) कर दिया गया है। अब एटीएस की तमाम प्रशासनिक गतिविधियां, केसों का अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन), खुफिया जांच और फील्ड ऑपरेशन से जुड़े सभी कामकाज पूर्ण रूप से सीआईडी के सीनियर अधिकारियों के निर्देशन और देखरेख में ही संचालित किए जाएंगे।

बदलेगा जांच का पूरा सिस्टम

इस नए आदेश के बाद अब एटीएस के किसी भी मामले की जांच का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। मामलों के अनुसंधानकर्ता (IO), सुपरवाइजर अधिकारियों की नियुक्ति, केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट और जांच से जुड़े तमाम पर्यवेक्षण कार्य अब सीआईडी प्रमुख के माध्यम से ही तय प्रक्रिया के तहत पूरे किए जाएंगे। हालांकि, एटीएस का मूल ढांचा और उसका मुख्य उद्देश्य पहले जैसा ही रहेगा। पुलिस अधीक्षक (SP) एटीएस, पुलिस महानिरीक्षक (IG-अभियान) के सीधे मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।

साल 2015 में हुआ था गठन

गौरतलब है कि झारखंड में पनप रहे आतंकवाद और उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से साल 2015 में एटीएस का गठन किया गया था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अधिसूचना के तहत इसे एक विशेष ‘राज्य स्तरीय थाने’ का दर्जा भी मिला हुआ है, जिससे यह पूरे राज्य में कहीं भी सीधे केस दर्ज कर कार्रवाई कर सकता है। बाद में साल 2021 में एक और अधिसूचना के जरिए एटीएस के दायरे को बढ़ाते हुए इसे बड़े संगठित आपराधिक गिरोहों (ऑर्गेनाइज्ड क्राइम) के खिलाफ भी कड़ा एक्शन लेने के लिए अधिकृत किया गया था।

गोपनीयता और कड़े एक्शन पर रहेगा जोर

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि एटीएस का मुख्य फोकस राज्य में आतंकियों के स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करने, उनके वित्तीय नेटवर्क (टेरर फंडिंग) को ध्वस्त करने और किसी भी संभावित आतंकी घटना को समय रहते रोकने पर रहेगा। इसके साथ ही विंग को अपने सभी ऑपरेशन्स और जांच प्रक्रियाओं में उच्च स्तरीय गोपनीयता (Strict Confidentiality) बनाए रखने की हिदायत दी गई है। पुलिस महकमे में इस फैसले को झारखंड में अपराधियों और देश विरोधियों पर चौतरफा वार करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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