अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Jamshedpur News: देश में बैटरी रिसाइक्लिंग और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति को नई दिशा देते हुए सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर ने बेंगलुरु स्थित कंपनी सीरुओर( CircuOre) प्राइवेट लिमिटेड के साथ लिथियम-आयन बैटरी रिसाइक्लिंग तकनीक का बुधवार को हस्तांतरण का करार किया है। इस समझौते के तहत एनएमएल द्वारा विकसित तकनीक का उपयोग कर खराब हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट, निकिल, मैंगनीज, तांबा, ऐलुमिनियम और ग्रेफाइट जैसे मूल्यवान पदार्थों की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक स्तर पर रिकवरी की जा सकेगी।
तकनीक हस्तांतरण कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी, मुख्य वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डॉ. मनीष कुमार झा, धातु निष्कर्षण विभाग के प्रमुख डॉ. संजय कुमार, नियंत्रक प्रशासन जय शंकर शरण, डॉ. अंकुर शर्मा, व्यापार प्रमुख डॉ. एस.के. पाल तथा डॉ. बीना कुमारी उपस्थित रहे। वहीं CircuOre प्राइवेट लिमिटेड की ओर से निदेशक श्रीकुमार वाचस्पति ने करार पर हस्ताक्षर किए।
श्रीकुमार वाचस्पति ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लिथियम-आयन बैटरियों के बढ़ते उपयोग के कारण आने वाले वर्षों में बैटरी कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में खराब बैटरियों को कचरा न मानकर एक महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन के रूप में उपयोग करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. मनीष कुमार झा ने बताया कि एनएमएल द्वारा विकसित तकनीक उन्नत धातुकर्म प्रक्रियाओं पर आधारित है, जिससे बैटरी कचरे में मौजूद धातुओं को सुरक्षित, नियंत्रित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से अलग किया जा सकता है। इससे महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह करार भारत में परिपत्र अर्थव्यवस्था, संसाधन सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैटरी रिसाइक्लिंग से न केवल पर्यावरणीय जोखिम कम होंगे, बल्कि मूल्यवान धातुओं को दोबारा उद्योगों में उपयोग कर आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकेगा। एनएमएल और CircuOre का यह सहयोग देश में टिकाऊ औद्योगिक विकास तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान करेगा।

