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दोपहर 11:42 बजे मोबाइल में ‘एसओएस’ वाली आवाज! अलर्ट से यूजर्स चौंके, यह थी वजह

New Delhi: शनिवार की दोपहर करीब 11:42 बजे देशभर में लाखों स्मार्टफोन यूजर्स उस समय चौंक गए, जब उनके मोबाइल फोन अचानक तेज एसओएस जैसी आवाज के साथ बज उठे। कई लोगों के फोन पर एक साथ अलर्ट मैसेज फ्लैश हुआ, जिससे कुछ समय के

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New Delhi: शनिवार की दोपहर करीब 11:42 बजे देशभर में लाखों स्मार्टफोन यूजर्स उस समय चौंक गए, जब उनके मोबाइल फोन अचानक तेज एसओएस जैसी आवाज के साथ बज उठे। कई लोगों के फोन पर एक साथ अलर्ट मैसेज फ्लैश हुआ, जिससे कुछ समय के लिए भ्रम और हल्की चिंता की स्थिति भी बन गई। हालांकि, यह कोई आपात स्थिति नहीं थी, बल्कि भारत सरकार द्वारा किए जा रहे एक महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण का हिस्सा था।

यह मैसेज हिंदी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में दिखाई दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि यह स्वदेशी “सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम” का परीक्षण है। मैसेज में यूजर्स से अपील की गई थी कि वे इस टेस्ट के दौरान किसी प्रकार की कार्रवाई न करें। दरअसल, दूरसंचार विभाग (डीओटी) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) मिलकर देश में मोबाइल आधारित आपदा संचार प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य है कि प्राकृतिक आपदाओं, मौसम संबंधी चेतावनियों और अन्य आपात स्थितियों की जानकारी समय पर आम नागरिकों तक पहुंचाई जा सके।

इस प्रणाली के तहत “सचेत” नामक एकीकृत अलर्ट सिस्टम को सक्रिय किया गया है, जिसे सी-डॉट ने विकसित किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम के माध्यम से अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 बिलियन से ज्यादा एसएमएस अलर्ट सफलतापूर्वक भेजे जा चुके हैं।

सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक की खासियत यह है कि यह किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट भेज सकती है, बिना नेटवर्क भीड़ के असर के। यही कारण है कि आपदा जैसी परिस्थितियों में यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। गौरतलब है कि इजराइल भी इसी तरह की तकनीक का उपयोग करता है, जहां मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट हमले की स्थिति में नागरिकों को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है, ताकि वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।

मोबाइल यूजर्स चाहें तो अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर “सेफ्टी एंड इमरजेंसी” सेक्शन के तहत इन अलर्ट्स को ऑन या ऑफ भी कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह के परीक्षण भविष्य में होने वाली आपदाओं से निपटने की तैयारी का हिस्सा हैं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।

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