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रांची: झारखंड के युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है। रांची के मोरहाबादी क्षेत्र में बन रही अत्याधुनिक लाइब्रेरी अब अपने पूर्ण स्वरूप की ओर बढ़ रही है। रविवार को राज्य के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वयं निर्माण स्थल का दौरा किया और कार्य की प्रगति का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने न केवल इंजीनियरों से तकनीकी बारीकियों पर चर्चा की, बल्कि इसे राज्य के भविष्य के लिए एक “मजबूत आधारशिला” भी बताया।
कॉरपोरेट सहयोग और आधुनिक सुविधाएं
लगभग 65 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह छह मंजिला लाइब्रेरी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के सीएसआर (CSR) फंड के सहयोग से तैयार की जा रही है। राज्यपाल ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि यह पुस्तकालय पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहाँ एक साथ हजारों छात्र शांतिपूर्ण माहौल में बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी कर सकेंगे।
राज्यपाल का निजी अनुभव और विजन
निरीक्षण के दौरान राज्यपाल गंगवार ने अपने बरेली कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि वहां भी उन्होंने इसी तरह की एक मॉडल लाइब्रेरी की स्थापना कराई थी। उन्होंने विश्वास जताया कि रांची की यह लाइब्रेरी न केवल झारखंड, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगी।
वीर सपूतों की गौरव गाथा से प्रेरित होंगे छात्र
इस मौके पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने एक बेहद खास जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस लाइब्रेरी की पहली मंजिल देश के परमवीर चक्र विजेताओं और महान क्रांतिकारियों को समर्पित होगी। वहां उनकी जीवनियों और चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि अध्ययन के लिए आने वाले युवा इन वीर सपूतों से प्रेरणा ले सकें। इसके अलावा, बुजुर्गों (वरिष्ठ नागरिकों) के लिए भी अलग से बैठने और पढ़ने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। यह परियोजना न केवल संसाधनों की कमी झेल रहे ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के लिए मददगार साबित होगी, बल्कि रांची को देश के चुनिंदा ‘एजुकेशन हब’ की श्रेणी में भी खड़ा कर देगी।

