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रांची: झारखंड की बहुचर्चित प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) 2023 के कथित पेपर लीक मामले में एक नया मोड़ आया है। झारखंड उच्च न्यायालय ने मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, संतोष मस्ताना को नियमित जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत में हुई इस सुनवाई ने परीक्षा की शुचिता और पुलिसिया दावों पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला
सितंबर 2024 में आयोजित हुई CGL परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद पुलिस ने संतोष मस्ताना को गिरफ्तार किया था। पुलिस की थ्योरी थी कि मस्ताना प्रश्न पत्र लीक करने के गिरोह का हिस्सा है। हालांकि, मस्ताना ने शुरू से ही इन आरोपों को खारिज किया। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने परीक्षा के लिए कुछ ‘गेस क्वेश्चन’ (संभावित प्रश्न) तैयार किए थे, जो इत्तेफाक से परीक्षा में आ गए, लेकिन उसने पेपर लीक की बात से साफ इनकार कर दिया।
सरकार और महाधिवक्ता का पक्ष
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का रुख भी मस्ताना के दावों के पक्ष में झुकता नजर आया। महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि अब तक की जांच में प्रश्न पत्र लीक होने का कोई भी पुख्ता साक्ष्य (Evidence) नहीं मिला है। सीआईडी (CID) की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिसे परीक्षार्थी और प्रार्थी ‘पेपर लीक’ कह रहे हैं, वह तकनीकी रूप से केवल गेस क्वेश्चन का मामला जान पड़ता है।
CBI जांच की मांग बरकरार
एक तरफ जहां संतोष मस्ताना को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर प्रकाश कुमार और अन्य परीक्षार्थियों द्वारा दायर जनहित याचिका पर भी सुनवाई जारी है। छात्र संगठन और प्रार्थी लगातार इस पूरे प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। फिलहाल, मस्ताना की जमानत को उन छात्रों के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है जो परीक्षा रद्द करने या दोबारा जांच की मांग कर रहे थे।
यह मामला झारखंड की राजनीति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि सीआईडी की अंतिम रिपोर्ट और जनहित याचिका पर कोर्ट का अगला रुख क्या होता है।

