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6,450 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, गांवों की सड़क और नारी शक्ति पर बड़ा दांव

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन राज्य की आर्थिक और बुनियादी विकास की दिशा में काफी महत्वपूर्ण रहा। शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6,450 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन राज्य की आर्थिक और बुनियादी विकास की दिशा में काफी महत्वपूर्ण रहा। शुक्रवार को सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 6,450 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि सरकार की उन प्राथमिकताओं को दर्शाता है जो सीधे तौर पर राज्य के आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं।

ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर सबसे बड़ा प्रहार

इस बजट में सरकार का सबसे अधिक ध्यान ‘गांव’ और ‘गरीब’ पर केंद्रित नजर आया। बजट का एक बड़ा हिस्सा, यानी 1,717.58 करोड़ रुपये, अकेले ग्रामीण कार्य विभाग को आवंटित किया गया है। इस भारी-भरकम राशि से राज्य के दूर-दराज के इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने, पुल-पुलियों के निर्माण और अधूरे पड़े ढांचागत कार्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि जब तक गांव मुख्यधारा से नहीं जुड़ेंगे, राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

आधी आबादी और सामाजिक सुरक्षा का रखा ख्याल

महिला सशक्तिकरण और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से 779 करोड़ रुपये का प्रावधान महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए किया गया है। यह राशि न केवल कल्याणकारी योजनाओं को मजबूती देगी, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे को भी विस्तृत करेगी। इसके साथ ही पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभागों को मिलाकर लगभग 1,250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास को और मजबूत करेगी।

स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की उम्मीद

शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए 323.94 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में भी बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 281.28 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए भी 407.21 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि राज्य में आपात स्थितियों से निपटने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखा जा सके। इसके अलावा जल संसाधन, वन एवं पर्यावरण और आदिवासी कल्याण के लिए भी अलग-अलग बजट आवंटित कर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास के हर पहलू को साथ लेकर चलना चाहती है।

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