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सदन में गूँजी झारखंड के 15 लाख प्रवासी मजदूरों की आवाज, 5 लाख मुआवजे की मांग

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही उस समय बेहद गंभीर हो गई, जब ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित विधायक जयराम महतो ने राज्य के लाखों प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों की पोल खोलते हुए

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रांची:  झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही उस समय बेहद गंभीर हो गई, जब ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित विधायक जयराम महतो ने राज्य के लाखों प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों की पोल खोलते हुए कहा कि झारखंड से लगभग 15 से 20 लाख लोग दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी की तलाश में जाते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 2.29 लाख मजदूरों का ही निबंधन (Registration) हुआ है।

निबंधन के बिना कैसे मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

जयराम महतो ने गहरी चिंता जताते हुए सवाल किया कि जब 80 प्रतिशत से अधिक मजदूरों का निबंधन ही नहीं हुआ है, तो किसी अनहोनी या संकट की स्थिति में सरकार उन तक सहायता कैसे पहुंचाएगी? उन्होंने नाइजर (Niger) जैसे देशों में फंसे मजदूरों का उदाहरण देते हुए कहा कि निबंधन के अभाव में मजदूरों को वतन वापसी और कानूनी सहायता में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

श्रम मंत्री का जवाब: सुरक्षा और सहायता के लिए सरकार प्रतिबद्ध

श्रम मंत्री संजय यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि विभाग मजदूरों के पंजीकरण को लेकर पूरी तरह सजग है और प्रचार-प्रसार के माध्यम से इसे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों की निगरानी और आपात सहायता के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम सक्रिय कर रखा है।

मुआवजे और अधिकारियों की नियुक्ति पर बड़ा फैसला

सदन में मजदूरों की मौत होने पर उनके परिजनों को 5 लाख रुपये तक का मुआवजा देने की मांग पुरजोर ढंग से उठी। मंत्री ने इस पर आश्वासन दिया कि वे मुख्यमंत्री से चर्चा कर मुआवजे की राशि बढ़ाने और आत्महत्या जैसे मामलों में भी सहायता देने पर गंभीरता से विचार करेंगे।

इसके अलावा, विधायक अरुप चटर्जी के सुझाव पर मंत्री ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने पांच प्रमुख राज्यों (जहां झारखंडी मजदूर अधिक संख्या में हैं) में विशेष पदाधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा है। ये अधिकारी वहां के स्थानीय प्रशासन से तालमेल बिठाकर झारखंडी मजदूरों की समस्याओं का तुरंत समाधान करेंगे। यह कदम भविष्य में पलायन कर रहे मजदूरों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

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