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Dhanbad: भारत में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में IIT (ISM) धनबाद के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। फिजिक्स विभाग के इंस्पायर फैकल्टी डॉ. एसके रियाज़ुद्दीन और उनकी टीम ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक ऐसा इलेक्ट्रोड मटीरियल तैयार किया है जो न केवल बेहद कुशल है, बल्कि इसकी लागत भी बहुत कम है। यह इनोवेशन भारत के ऊर्जा क्षेत्र को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।
महंगे प्लैटिनम का सस्ता और दमदार विकल्प
डॉ. रियाज़ुद्दीन के अनुसार, अब तक पानी से हाइड्रोजन अलग करने की प्रक्रिया (इलेक्ट्रोलेसिस) में प्लैटिनम और रूथेनियम जैसे बेहद महंगे धातुओं का उपयोग होता था, जिससे उत्पादन की लागत बहुत बढ़ जाती थी। वैज्ञानिकों की टीम ने अब मोलिब्डेनम, वैनेडियम, सल्फर और कार्बन जैसे आसानी से मिलने वाले तत्वों का इस्तेमाल कर नया कैटलिस्ट विकसित किया है। यह नया मटीरियल कम बिजली की खपत में पानी को तेजी से तोड़कर हाइड्रोजन पैदा करता है।
सौर ऊर्जा से सीधे बनेगा ईंधन

इस रिसर्च की एक और खास बात यह है कि टीम ने एक साधारण सिलिकॉन सोलर सेल की मदद से सीधे सूरज की रोशनी का उपयोग कर ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का प्रदर्शन किया है। इसका मतलब है कि भविष्य में बिना किसी भारी बिजली खर्च के, सीधे धूप की मदद से सस्ता और साफ़ ईंधन प्राप्त किया जा सकेगा। यह शोध अंतर्राष्ट्रीय जर्नल ‘स्मॉल’ (Small) में भी प्रकाशित हुआ है।
भारत को मिलेगा बड़ा लाभ
भारत सरकार ने 2030 तक सालाना 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। IIT धनबाद की यह खोज इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग स्टील प्लांट, फर्टिलाइजर इंडस्ट्री, रिफाइनरी और आने वाले समय में भारी वाहनों व बिजली उत्पादन में बड़े स्तर पर किया जा सकेगा। यह कामयाबी न केवल धनबाद बल्कि पूरे देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

