अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक कार्यशैली में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य विधानसभा के पंचम (बजट) सत्र के दौरान ‘राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन’ (NeVA) परियोजना का विधिवत उद्घाटन किया। इस पहल के साथ ही झारखंड विधानसभा अब देश की उन चुनिंदा विधानसभाओं में शामिल हो गई है, जो पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होने की राह पर हैं।
विधायकों को मिली टैबलेट की ‘ताकत’
विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने सभी मंत्रियों और विधायकों को टैबलेट वितरित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तकनीक के आने से माननीय सदस्यों को अब भारी-भरकम फाइलों और कागजों के बंडल लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अब विधायकों को देर रात विधानसभा आकर प्रश्न डालने या कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी; अब यह सब कुछ उनके टैबलेट के जरिए कहीं से भी संभव हो सकेगा।
‘वन नेशन-वन एप्लीकेशन’ का सपना हो रहा साकार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि देश के लगभग 20 राज्यों में यह डिजिटल प्रणाली सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है। झारखंड के 25वें वर्ष (रजत जयंती वर्ष) में प्रवेश करने के साथ ही यह कदम राज्य की परिपक्वता को दर्शाता है। NeVA एप्लीकेशन न केवल विधायी कार्यों को सरल बनाएगा, बल्कि सरकार और विधायकों के बीच बेहतर समन्वय (Coordination) भी स्थापित करेगा। कागजों की खपत कम होने से यह पर्यावरण के अनुकूल भी साबित होगा।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
तकनीक के फायदों के साथ मुख्यमंत्री ने इसकी चुनौतियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने साइबर अपराध के बढ़ते खतरों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि डिजिटल होना जितना सुविधाजनक है, उतना ही सतर्क रहने की भी जरूरत है। इसी उद्देश्य से विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र (Training Session) भी आयोजित किया गया, ताकि वे एप्लीकेशन की सुरक्षा और उपयोग की बारीकियों को समझ सकें।
विधानसभा अध्यक्ष की पहल की सराहना
मुख्यमंत्री ने इस बदलाव का श्रेय विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो के निरंतर प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को पारदर्शी और गतिवान बनाने के लिए डिजिटाइजेशन अनिवार्य था। बजट सत्र 2026 से ही इसकी आंशिक शुरुआत हो जाएगी, जिससे सदन के भीतर सूचनाओं का आदान-प्रदान बिजली की रफ्तार से होगा।
इस अवसर पर राज्य के सभी कैबिनेट मंत्री, सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक सहित विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह कदम निश्चित रूप से झारखंड की विधायी प्रणाली को आधुनिक और अधिक जवाबदेह बनाएगा।

