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भारत-US डील: ट्रंप ने घटाया 50% टैरिफ, मोदी करेंगे $500 अरब का निवेश

New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता ने वैश्विक कूटनीति के समीकरण बदल दिए हैं। इस संवाद के तुरंत बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले भारी-भरकम 50% आयात शुल्क (टैरिफ) को घटाकर महज 18% करने

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New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता ने वैश्विक कूटनीति के समीकरण बदल दिए हैं। इस संवाद के तुरंत बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले भारी-भरकम 50% आयात शुल्क (टैरिफ) को घटाकर महज 18% करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इसे दोनों देशों की ‘सच्ची जीत’ बताते हुए कहा कि यह पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अटूट विश्वास का नतीजा है।

रूस से दूरी, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल की करीबी

इस समझौते का सबसे बड़ा रणनीतिक मोड़ ऊर्जा क्षेत्र में आया है। भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा और इसकी भरपाई अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाकर की जाएगी। इतना ही नहीं, अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला से तेल आयात करने का विकल्प भी दिया है, जहाँ वर्तमान में अमेरिकी प्रभाव काफी अधिक है। इस कदम से भारत अब अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र का प्रमुख साझेदार बन जाएगा, जिससे सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकों और वहां की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

42 लाख करोड़ रुपये का महा-निवेश

व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर (लगभग 42 लाख करोड़ रुपये) के विशाल निवेश का संकल्प लिया है। यह निवेश मुख्य रूप से परिवहन, ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में होगा, जो ट्रंप की ‘मेक इन अमेरिका’ नीति को बड़ी मजबूती देगा। गौरतलब है कि रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगी 25% की पेनल्टी को भी अब पूरी तरह हटा लिया गया है। पीएम मोदी ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी।

किसानों के हितों की सुरक्षा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस विशाल डील के बावजूद भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर कृषि और डेयरी के साथ कोई समझौता नहीं किया है। भारतीय किसानों और छोटे कारोबारियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान रखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्वाड (QUAD) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा एवं तकनीकी साझेदारी को एक नई और शक्तिशाली दिशा प्रदान करेगा।

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