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Motihari, (Bihar): भारतीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के लिए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने अब ‘फेक करेंसी’ का सहारा लिया है। खुफिया रिपोर्ट्स और बिहार एसटीएफ की हालिया कार्रवाई से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में छपे भारतीय जाली नोट बड़े पैमाने पर नेपाल के रास्ते बिहार पहुंच रहे हैं। तस्करी का यह नेटवर्क इतना शातिर है कि साधारण तौर पर इन नोटों की पहचान करना लगभग नामुमकिन है।
उत्तम ग्रेड की छपाई, छोटे नोटों पर फोकस
तस्करों की नई रणनीति अब छोटे नोटों (जैसे 200 रुपये) को बाजार में उतारने की है। 30 जनवरी को मोतिहारी के हरैया और 29 जनवरी को मधुबनी के हरलाखी में हुई गिरफ्तारियों ने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। जब्त किए गए नोटों की क्वालिटी ‘उत्तम ग्रेड’ की है। तस्करों का मानना है कि छोटे नोट होने के कारण आम दुकानदार इन्हें बिना जांचे आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, जिससे इन्हें खपाना आसान हो जाता है।
तस्करों के मोबाइल से खुले राज
मोतिहारी और मधुबनी में पकड़े गए तस्करों—तिलक बहादुर, सरोज कुमार और मुकेश महतो—के पास से 13 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इन फोनों को खंगालने पर नेपाल से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैले एक विशाल नेटवर्क के सुराग मिले हैं। पुलिस को नकली नोट छापने वाले विशेष कागज भी बरामद हुए हैं, जो इस धंधे की गहराई को दर्शाते हैं। मंगलवार को मधुबनी के ‘नो मेन्स लैंड’ से 14 लाख रुपये की जाली मुद्रा जब्त होना इस खतरे की गंभीरता को बयान करता है।
पुलिस और एसटीएफ का ‘ऑपरेशन क्लीन’
लगातार मिल रही खेप के बाद बिहार एसटीएफ ने मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा और मधुबनी समेत कई जिलों की पुलिस को ‘रेड अलर्ट’ पर रखा है। तिरहुत रेंज के डीआईजी ने वैशाली और शिवहर पुलिस को भी सूचनाएं जुटाने और संदिग्धों पर नजर रखने का कड़ा निर्देश दिया है। एसटीएफ की एक विशेष टीम अब नेपाल बॉर्डर पर डेरा डाले हुए है ताकि सीमा पार से होने वाली इस ‘आर्थिक घुसपैठ’ और मादक पदार्थों की तस्करी को जड़ से खत्म किया जा सके।
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