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रांची। झारखंड सरकार के कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राज्य भाषा विभाग द्वारा वर्ष 2026 के लिए जारी अवकाश तालिका में शब्बे बरात की छुट्टी शामिल नहीं किए जाने पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। आमया संगठन ने इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए सरकार से अविलंब संशोधन की मांग की है।
आमया संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एस अली ने इस संबंध में विभागीय सचिव के नाम एक मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि जारी अधिसूचना में शब्बे बरात और चहल्लुम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्वों की छुट्टी को शामिल नहीं किया गया है। इससे सरकारी सेवकों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि शब्बे बरात मुस्लिम समुदाय का एक अहम धार्मिक अवसर है, जिसमें लोग रात भर इबादत करते हैं और अगले दिन रोजा रखते हैं। ऐसे में यदि अवकाश नहीं दिया जाता है, तो धर्मावलंबियों को अपने धार्मिक कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
एस अली ने कहा कि यह स्थिति कहीं से भी न्यायसंगत नहीं कही जा सकती। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व वर्षों में भी अवकाश तालिका में इस प्रकार की त्रुटि हुई थी, लेकिन जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बाद में उसमें सुधार कर शब्बे बरात की छुट्टी घोषित की गई थी। इस बार भी सरकार को उसी परंपरा का पालन करना चाहिए।
संगठन ने मांग की है कि वर्ष 2026 के लिए जारी अवकाश तालिका की अधिसूचना में संशोधन करते हुए 3 फरवरी या 4 फरवरी 2026 को शब्बे बरात की सरकारी छुट्टी घोषित की जाए। साथ ही भविष्य में अवकाश तालिका तैयार करते समय सभी धार्मिक और सामाजिक पर्वों को समुचित स्थान देने पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसी भी समुदाय की आस्था को ठेस न पहुंचे।
आमया संगठन का कहना है कि राज्य की विविधतापूर्ण सामाजिक संरचना को देखते हुए सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार करते हुए जल्द निर्णय लेगी, जिससे सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक संतुलन बना रहे।

