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डिग्री के बाद क्या सिर्फ नौकरी काफी है? राष्ट्रपति ने दिया अलग नजरिया

India News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा और जीवन के उद्देश्य पर गहरी बात रखी। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने के बाद छात्रों की राहें अलग-अलग हो

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India News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए शिक्षा और जीवन के उद्देश्य पर गहरी बात रखी। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने के बाद छात्रों की राहें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन असली परीक्षा तब शुरू होती है, जब वे समाज के बीच अपनी भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि कोई छात्र सरकारी या निजी नौकरी में जाएगा, कोई उच्च शिक्षा या शोध को चुनेगा, तो कोई अपना व्यवसाय शुरू करेगा या शिक्षण के क्षेत्र में जाएगा। रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ मूल गुण ऐसे हैं जो हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की आदत, ईमानदारी, नैतिकता, कठिन हालात में भी सही राह पर टिके रहने और बदलाव को अपनाने का साहस जैसे मूल्यों पर खास जोर दिया।

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उन्होंने छात्रों को यह भी याद दिलाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखना जरूरी है। टीमवर्क, समय और संसाधनों का सही उपयोग और अपने ज्ञान का इस्तेमाल केवल निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के हित में करना ही शिक्षा की असली सार्थकता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा केवल आजीविका कमाने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम भी है। जिस समाज ने व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, उसके प्रति जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम करना इस सामाजिक ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह चुनौती खासकर युवाओं को प्रभावित कर रही है और इससे समाज का सामाजिक व नैतिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे युवाओं को सही दिशा दिखाएं।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में आने वाले दो दशक बेहद अहम हैं और देश का भविष्य वैज्ञानिक सोच रखने वाले, जिम्मेदार और सेवा भाव से जुड़े युवाओं पर निर्भर करता है।

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