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Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में नीलगायों का बढ़ता आतंक अब किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। हैदरनगर प्रखंड के गोल्हना, रतनबिघा, बिंदुबिगहा, पतरीया, जमुआ कला, बिलासपुर, नौडीहा, सलैयाटीकर, खरगड़ा, सजवन, सलेमपुर, सड़ेया, कुकही, इमामनगर बरेवा, बरवाडीह और लोहरपुरा जैसे दर्जनों गांवों में फसलें रातों-रात तबाह हो रही हैं। किसान कहते हैं कि खेत में दिन की मेहनत और रात का सुकून—दोनों छिन चुके हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, नीलगायों के झुंड अंधेरा होते ही खेतों में घुस जाते हैं और कुछ ही घंटों में गेहूं, चना, सरसों, अरहर, कुलथी और सब्जियों की पूरी फसल चट कर जाते हैं। कई किसान पूरी रात खेतों में पहरा दे रहे हैं, कोई बाड़ लगा रहा है, तो कोई टॉर्च और शोर के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहा है। फिर भी नीलगायों के सामने ये उपाय बेअसर साबित हो रहे हैं।
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किसानों का दर्द यही है कि वे कर्ज लेकर खेती करते हैं। बीज, खाद, सिंचाई—सब पर पैसा लगता है। लेकिन जब फसल तैयार होती है, तभी नीलगाय महीनों की मेहनत कुचल देती हैं। ऐसे में परिवार चलाना और कर्ज चुकाना दोनों मुश्किल हो जाता है।
इसी गुस्से और बेबसी के बीच किसानों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार सरकार की तर्ज पर नीलगायों को ‘वर्मीन’ घोषित करने और ‘शूट एंड साइट’ का आदेश जारी करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक फसल बचाना नामुमकिन है।
स्थानीय नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ सैकड़ों किसानों ने गुरुवार को एक स्वर में कहा कि सरकार फसल सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रही है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की जाएगी।

