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घाघरा (गुमला):- कभी शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के लिए पहचाना जाने वाला घाघरा प्रखंड आज नशे के खतरनाक जाल में उलझता जा रहा है। ब्राउन शुगर, गांजा और अन्य मादक पदार्थों का अवैध कारोबार यहां तेजी से पांव पसार रहा है, जिसकी सबसे बड़ी कीमत क्षेत्र के युवा और स्कूली बच्चे चुका रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नशे के सौदागर संगठित नेटवर्क के तहत बेहद चालाकी से काम कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नशा अब बंद कमरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गलियों, चौक-चौराहों, फेरीवालों और कुछ दुकानों के जरिए खुलेआम बेचा जा रहा है। आसान उपलब्धता के कारण किशोर और युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।
नशे की लत पूरी करने के लिए पैसे न मिलने पर कई युवा अपराध का रास्ता अपना रहे हैं। चोरी, झपटमारी और अन्य आपराधिक घटनाओं में वृद्धि से आम लोगों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है। इसका असर सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों का मानसिक संतुलन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
कई माता-पिता अपने बच्चों को नशे की दलदल में फंसते देख रहे हैं, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से चुप हैं। यही खामोशी नशा कारोबारियों को और मजबूत बना रही है। प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई को स्थानीय लोग नाकाफी मान रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ रोजगार, जागरूकता और पारिवारिक संवाद को भी मजबूती देना होगा। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

घाघरा से दीनदयाल राम की रिपोट

