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पालकोट (गुमला): गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित हांसदोन गांव में शुक्रवार को सन्नाटा तब टूटा जब जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की टीम ग्रामीणों के बीच कानूनी जागरूकता का संदेश लेकर पहुँची। बाघिमा पंचायत के इस सुदूरवर्ती गांव में नालसा और झालसा के निर्देश पर एक विशेष शिविर लगाया गया, जिसका उद्देश्य समाज की रगों में जहर की तरह फैली ‘बाल विवाह’ और ‘डायन प्रथा’ जैसी कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकना था।
बाल विवाह: जेल और एक लाख का जुर्माना
कार्यक्रम के दौरान पीएलवी राजू साहू ने ग्रामीणों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि बाल विवाह कोई परंपरा नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ के तहत यदि कोई भी व्यक्ति नाबालिग की शादी कराता या उसमें शामिल होता है, तो उसे दो साल तक की कड़ी कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
अंधविश्वास का अंत: डायन प्रथा पर सख्त हिदायत
वहीं, डायन प्रथा को एक अमानवीय कुप्रथा बताते हुए ग्रामीणों को जागरूक किया गया कि किसी महिला पर जादू-टोना का झूठा आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित करना उसे मौत के मुँह में धकेलने जैसा है। कानून ऐसे अपराधियों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगा। डालसा गुमला के अध्यक्ष ध्रुव चंद्र मिश्रा और सचिव रामकुमार लाल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीके भी बताए गए। इस पहल से ग्रामीणों में यह विश्वास जगा है कि कानून उनके साथ खड़ा है।

