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Ranchi : जिला प्रशासन ने राजस्व एवं भूमि सुधार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कड़ा रुख अपनाया है। आम नागरिकों से सीधे जुड़े दाखिल-खारिज, सीमांकन, परिशोधन एवं भूमि प्रतिवेदन जैसे मामलों में हो रही देरी को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी क्रम में 17 दिसंबर 2025 को रांची समाहरणालय स्थित ब्लॉक-बी के कक्ष संख्या 505 में उपायुक्त श्री भजन्त्री की अध्यक्षता में राजस्व कार्यों की एक विस्तृत समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी अंचलों से जुड़े लंबित मामलों की गहन समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जनहित से जुड़े राजस्व मामलों का निष्पादन सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कड़े शब्दों में कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान करना जिला प्रशासन का मूल दायित्व है। राजस्व कर्मचारी, अधीनस्थ अमीन, राजस्व उप निरीक्षक एवं अंचल निरीक्षक अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार लाएं। यदि किसी भी स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
समीक्षा बैठक का मुख्य फोकस जिले में लंबित राजस्व वादों पर रहा। विशेष रूप से 90 दिनों से अधिक समय से लंबित दाखिल-खारिज मामलों चाहे वे आपत्ति रहित हों या आपत्ति सहित की हल्कावार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटाया जाए। वहीं, 30 दिनों से अधिक लंबित आपत्ति रहित दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, बैठक में सीमांकन से जुड़े लंबित आवेदनों की प्रगति, उनमें आ रही बाधाओं तथा उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई। रिकॉर्ड सुधार एवं परिशोधन से संबंधित मामलों की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि भूमि रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की त्रुटि आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती है, इसलिए परिशोधन कार्यों में विशेष सतर्कता और गति लाई जाए।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा मांगे गए भूमि संबंधी प्रतिवेदनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि संबंधित विभागों के लिए आवश्यक प्रतिवेदन समय पर तैयार कर प्रेषित किए जाएं, ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। इसके साथ ही जन सुनवाई एवं लोक शिकायत निवारण प्रणाली के तहत प्राप्त शिकायतों के निष्पादन की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।
एक महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में दोहरी जमाबंदी के मामलों पर विशेष अवलोकन करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि ऐसे मामलों से न केवल प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ती हैं, बल्कि आम जनता को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए इनका शीघ्र समाधान आवश्यक है।
बैठक में सभी अंचलों से प्राप्त अद्यतन प्रतिवेदनों पर गहन चर्चा की गई। उपायुक्त ने दो टूक कहा कि राजस्व कार्य जनसेवा का अहम हिस्सा हैं और इनमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। सभी लंबित मामलों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने, कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत दिलाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची उत्कर्ष कुमार, अपर समाहर्ता रामनारायण सिंह, भूमि सुधार उप समाहर्ता मुकेश कुमार, जिला भू-अर्जन अधिकारी के.के. राजहंस, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी मोनी कुमारी सहित जिला परिवहन, समाज कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी तथा जिले के सभी अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उपायुक्त श्री भजन्त्री ने कहा कि “राजस्व कार्यों का समयबद्ध निष्पादन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं न्यायोचित राहत मिले।” उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से पूर्ण समर्पण भाव के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
यह बैठक रांची जिला प्रशासन की उस सतत प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत भूमि एवं राजस्व संबंधी सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसी समीक्षात्मक बैठकों के माध्यम से कार्यों की नियमित निगरानी जारी रहेगी।

