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झारखंड में ही मिलेगा 21 गंभीर बीमारियों का इलाज, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य योजना से बड़ी राहत

Ranchi : झारखंड के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी और राहत भरी पहल की जा रही है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। जल्द

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Ranchi : झारखंड के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी और राहत भरी पहल की जा रही है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। जल्द ही झारखंड में ही 21 गंभीर बीमारियों का समुचित और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि बाहर इलाज कराने की झंझट से भी मुक्ति मिलेगी।

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंभीर बीमारियों के इलाज को राज्य में ही सुलभ कराने की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपचार की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सदर अस्पताल, रांची में व्यापक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए सदर अस्पताल का देश के प्रतिष्ठित संस्थान सीएमसी वेल्लोर से एमओयू किया जाएगा, ताकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल चिकित्सा प्रक्रिया रांची में ही संभव हो सके। यह पहल खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी।

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में 21 गंभीर बीमारियों का उपचार मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत किया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक बीमारी के इलाज के लिए निश्चित पैकेज तय किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के खर्च को लेकर अनिश्चितता और परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य के चार प्रमुख सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), शहीद निर्मल महतो मेमोरियल कॉलेज एंड हॉस्पिटल धनबाद, सदर अस्पताल रांची और एमजीएम कॉलेज एंड हॉस्पिटल जमशेदपुर में यह उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही राज्य के चार बड़े निजी अस्पतालों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर अधिक से अधिक मरीजों को इलाज मिल सके।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि झारखंड के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। इसके लिए आवश्यक संसाधन, आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ चिकित्सकों की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी शशि प्रकाश झा, स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अपर कार्यकारी निदेशक सीमा, डीआईसी सिद्धार्थ सान्याल और उपसचिव ध्रुव प्रसाद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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