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तुर्की में जहां उगता है सबसे ज्यादा गेहूं, अब जमीन में हो रहे सैकड़ों गड्ढे?

World News: तुर्की का कोन्या मैदान, जो देश के कुल कृषि क्षेत्र का 11.2 प्रतिशत है और जहां सबसे ज्यादा गेहूं उगाया जाता है, वह इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। यहाँ भूजल (ग्राउंड वाटर) के अत्यधिक इस्तेमाल और सूखे

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World News: तुर्की का कोन्या मैदान, जो देश के कुल कृषि क्षेत्र का 11.2 प्रतिशत है और जहां सबसे ज्यादा गेहूं उगाया जाता है, वह इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। यहाँ भूजल (ग्राउंड वाटर) के अत्यधिक इस्तेमाल और सूखे के चलते जमीन में सैकड़ों भयानक गड्ढे (सिंकहोल) बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं।

तुर्की के सबसे बड़े गेहूं मैदान में भूमि धंसने का संकट, भूजल के अंधाधुंध दोहन से बनी सिंकहोल

तुर्की की आपदा प्रबंधन एजेंसी की नई रिपोर्ट के मुताबिक, कोन्या बेसिन में अब तक 684 ऐसे गड्ढों की आधिकारिक पहचान की गई है। हालाँकि, एक रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, 2021 तक ऐसे सिंकहोल की संख्या बढ़कर 2,550 हो चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी पुष्टि की गई है कि साल 2025 में करीब 20 नए बड़े सिंकहोल बने हैं। इन गड्ढों की गहराई 30 मीटर से ज़्यादा और चौड़ाई 100 फीट तक बताई जा रही है।

किसानों और प्रशासन की अनदेखी ने बढ़ाया संकट

विशेषज्ञ इसे इंसानों के कारण आई आपदा बताते हैं। उनका कहना है कि यह संकट अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले 20 साल से किसानों और प्रशासन की अनदेखी के कारण धीरे-धीरे बढ़ा है। कोन्या मैदान की भूवैज्ञानिक संरचना कार्स्ट टाइप की है, जिसका अर्थ है कि यह कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है, जो पानी में घुलकर गड्ढे बनाते हैं।

लेकिन इस प्राकृतिक प्रक्रिया को तेज किया है मानवजनित लापरवाही ने। चुकंदर और मक्का जैसी पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं चल रहे हैं। 1970 के दशक से कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर लेवल 60 मीटर तक गिर चुका है। अवैध कुओं और अनियंत्रित पंपिंग ने ज़मीन को कमज़ोर कर दिया है, जिससे सतह अचानक धंस रही है और यह सिंकहोल संकट गहराता जा रहा है।

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