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Chatra News: चतरा जिले के सिमरिया और टंडवा इलाकों में इन दिनों पब्लिक सड़कें मौत के रास्ते बन चुकी हैं। कोयला ढोने वाले ओवरलोड ट्रक ऐसी रफ्तार से दौड़ते हैं कि दर्जनों परिवार हमेशा के लिए उजड़ चुके हैं। कोई बेटे को खो चुका है, किसी का सुहाग उजड़ गया, तो किसी मां की गोद हमेशा के लिए खाली हो गई। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले महीनों में जितनी मौतें हुई हैं, उतनी किसी और वजह से नहीं—सिर्फ इन भारी कोल वाहनों से।
मुआवजे पर टलती जिम्मेदारी
हर हादसे के बाद वही पुरानी कहानी दोहराई जाती है। सीसीएल की ओर से पांच से दस लाख रुपये का मुआवजा देकर मामला शांत करने की कोशिश होती है। लेकिन सवाल सबसे बड़ा है—क्या एक इंसान की जान की कीमत सिर्फ दस लाख की है? पीड़ित परिवार कहते हैं कि “हमारी जिंदगियां क्या इतने ही पैसे की हैं?”
लोगों का गुस्सा इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि सीसीएल के पास अपनी बाईपास रोड बनाने की क्षमता और जमीन दोनों मौजूद हैं, पर फिर भी पब्लिक सड़क का ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
ओवरलोड ट्रक, नशे में ड्राइवर—हादसों का फॉर्मूला तैयार
ग्रामीणों का आरोप है कि कई ड्राइवर नशे में होते हैं और वाहन ओवरलोड होते हैं, जिसकी वजह से नियंत्रण खोने पर हादसे होते हैं। कई बार शिकायतें की गईं लेकिन न प्रशासन जागा, न विभाग ने कदम उठाया। पूरा इलाका मानो ट्रकों की दहशत में जी रहा है।
जनता का आक्रोश, नेताओं की खामोशी
हैरानी की बात है कि कोयला ढुलाई पर निर्भर इतनी बड़ी इंडस्ट्री के बीच स्थानीय नेता खामोश हैं। जनता पूछ रही है— “बाईपास रोड कब बनेगी? और हमारी जान की कीमत सिर्फ मुआवजा क्यों?” यदि हालात ऐसे ही रहे तो ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। फिलहाल चतरा की सड़कें कोयले की चमक के नीचे खून से रंगती जा रही हैं और जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।

