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Chaibasa News: चाईबासा में बुधवार का दिन पूरी तरह भक्ति, प्रेम और सेवा की भावना से भरा रहा। कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरुद्वारा नानक दरबार में पहले सिख गुरु श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सवेरे से ही गुरुद्वारा परिसर भक्तों की आवाज़ों, शबद-कीर्तन और अरदास से गूंज उठा।
सिख परंपरा में यह दिन खास माना जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। दूर-दूर क्षेत्रों से श्रद्धालु सुबह-सुबह परिवार सहित गुरुद्वारा पहुंचे, माथा टेका और गुरु के चरणों में अरदास की।
कीर्तन और अरदास से गूंजा परिसर
गुरुद्वारा परिसर में कीर्तन दरबार का आयोजन हुआ जहां रागी जत्थों ने गुरु नानक देव जी की वाणी का गायन किया। “वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह” के स्वर लगातार गुंजायमान रहे। वातावरण में ऐसी शांति और सकारात्मकता थी कि हर आने वाले का मन भक्तिभाव से भर गया।
हज़ारों लोगों ने किया लंगर ग्रहण
भक्ति के साथ-साथ सेवा का अद्भुत संगम भी देखने को मिला। विशाल लंगर की व्यवस्था की गई थी, जहां हज़ारों लोगों ने प्रेमपूर्वक खाना ग्रहण किया। कोई छोटा-बड़ा नहीं, हर धर्म, हर वर्ग के लोग एक साथ पंगत में बैठे – यही गुरु नानक की सच्ची सीख है: सब बराबर, सब एक।
गुरुद्वारा समिति ने साझा की प्रेरणा
श्री गुरु सिंह सभा चाईबासा के अध्यक्ष गुरमुख सिंह खोखर ने कहा कि गुरु नानक देव जी का संदेश सिर्फ सिख समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है।
उन्होंने कहा, “हमारे गुरु ने प्रेम, सेवा और समानता का रास्ता दिखाया। यही शिक्षा हमें हर वर्ष प्रेरित करती है।”
सेवा, शांति और भाईचारे का संदेश
सेवादारों ने पानी, प्रसाद और लंगर में तन-मन से सेवा की। दिनभर भक्तों का आना-जाना लगा रहा। शाम तक गुरुद्वारा परिसर उज्ज्वल रौशनी, कीर्तन और शांति के रंग में डूबा रहा।
श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे गुरु नानक देव जी की वाणी – “सब में एक ज्योत” – को जीवन में अपनाएं और प्रेम-भाईचारे का संदेश आगे बढ़ाएं।

