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छत्तीसगढ़ की बिरसा मुंडा सेवा समिति ने खूंटी के उलिहातू से मांगी पवित्र मिट्टी

Khunti : भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू एक बार फिर श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बनने जा रही है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले स्थित बिरसा मुंडा सेवा समिति ने खूंटी जिले के उलिहातू ग्राम प्रधान को पत्र लिखकर वहां से पवित्र मिट्टी लाने का

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Khunti : भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू एक बार फिर श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बनने जा रही है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले स्थित बिरसा मुंडा सेवा समिति ने खूंटी जिले के उलिहातू ग्राम प्रधान को पत्र लिखकर वहां से पवित्र मिट्टी लाने का अनुरोध किया है। समिति इस मिट्टी को अपने क्षेत्र में भगवान बिरसा मुंडा की भव्य आदमकद प्रतिमा की स्थापना स्थल पर स्थापित करना चाहती है।

सेवा समिति की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र में बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की योजना पर तेजी से कार्य हो रहा है। इस ऐतिहासिक और भावनात्मक परियोजना के तहत समिति एक नवंबर को उनकी जन्मस्थली उलिहातू पहुंचकर पवित्र मिट्टी लेने की योजना बना रही है। इस मिट्टी को वहां के ग्राम प्रधान और ग्रामसभा की अनुमति से प्रतिमा स्थल पर श्रद्धा के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा।

समिति के अध्यक्ष गोवर्धन भगत ने अपने पत्र में लिखा है कि भगवान बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समाज के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत भूमि के महान स्वतंत्रता सेनानी और जननायक हैं। उन्होंने अपने अल्प जीवन में अंग्रेजों के खिलाफ जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़कर स्वाभिमान और आजादी की अलख जगाई। ऐसे महानायक की प्रतिमा की स्थापना समाज को उनके आदर्शों और बलिदान की याद दिलाती रहेगी।

गोवर्धन भगत ने आगे लिखा है कि जन्मस्थली की मिट्टी लाना न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि यह एक भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। इस कार्य से छत्तीसगढ़ और झारखंड के लोगों के बीच भाईचारे और साझा सम्मान की भावना और मजबूत होगी।

समिति ने ग्राम प्रधान से सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा है कि वे स्थानीय प्रशासन और ग्रामसभा से अनुमति लेकर मिट्टी संग्रहण की प्रक्रिया को पूरी श्रद्धा और परंपरा के अनुरूप पूरा करेंगे। समिति के सदस्यों का कहना है कि भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण आगामी महीनों में भव्य आयोजन के तहत किया जाएगा, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आमजन शामिल होंगे।

बता दें कि भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले स्थित उलिहातू गांव में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ उलगुलान आंदोलन की अगुवाई की थी। आज भी झारखंड और मध्य भारत में उन्हें “धरती आबा” यानी पृथ्वी पिता के रूप में पूजनीय माना जाता है।

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