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धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासी संगठनों की बड़ी मुहिम, तुपूदाना से चांदगांव तक निकलेगी जनाक्रोश रैली

Ranchi : तुपूदाना के चांदगांव में इसाई मिशनरियों द्वारा पिछले एक वर्ष से चल रही चंगाई सभा के विरोध में अब आदिवासी सरना समुदाय ने मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में 23 नवंबर को एक जनाक्रोश रैली आयोजित की जाएगी। इस निर्णय की जानकारी

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Ranchi : तुपूदाना के चांदगांव में इसाई मिशनरियों द्वारा पिछले एक वर्ष से चल रही चंगाई सभा के विरोध में अब आदिवासी सरना समुदाय ने मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में 23 नवंबर को एक जनाक्रोश रैली आयोजित की जाएगी। इस निर्णय की जानकारी झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के प्रदेश अध्यक्ष मेघा उरांव ने दी।

उन्होंने बताया कि रैली की शुरुआत तुपूदाना के दशमाईल मैदान से होगी, जहां बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित कई राज्यों से आए हजारों सरना धर्मावलंबी एकत्र होंगे। इसके बाद सभी लोग चांदगांव की ओर कूच कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

इस विषय पर शुक्रवार को अनगड़ा थाना स्थित डाक बंगला और नगड़ी के स्वर्णरेखा होटल में सरना समाज के विभिन्न संगठनों की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता ग्राम प्रधान शिवलाल पहान ने की। बैठक में रैली को सफल बनाने पर जोर दिया गया और सभी प्रतिनिधियों से इसमें अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

मेघा उरांव ने कहा कि चांदगांव में सालभर से “चंगाई सभा” और “प्रार्थना कार्यक्रम” के नाम पर धर्मांतरण की गतिविधियां लगातार चल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन और स्थानीय थाना को शिकायत दी गई थी। प्रशासन ने 15 दिनों में टेंट हटाने का आश्वासन दिया था, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मिशनरियों द्वारा गरीब, दिव्यांग, नेत्रहीन और गंभीर रूप से बीमार लोगों को “दिव्य उपचार” के नाम पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।

बैठक में ग्राम प्रधान शिवलाल पहान ने कहा कि “बीमारी ठीक करने या अमीर बनाने” के बहाने सरना समाज के लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और समाज इस तरह के प्रयासों का जोरदार विरोध करेगा।

कार्यक्रम में जनजातीय सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, शनि उरांव, सोमा उरांव, अजय भोक्ता, पुसनाग मुंडा, शुभूनाथ गंझू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि 23 नवंबर की रैली सरना आस्था की एकजुटता और पहचान की प्रतीक होगी।

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