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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के कान में जु तक नहीं रेंगी“
जनता परेशान, अफसर-मुखिया बेफिक्र”
“हाईमास्ट की रोशनी बुझी, प्रशासन की संवेदनाएँ भी”
चैनपुर- बस स्टैंड का हाईमास्ट लाइट पिछले 2-3 सालों से खराब पड़ा हुआ है। इस दौरान न जाने कितनी बार ग्रामीणों ने आवाज उठाई, शांति समिति की बैठकों में मुद्दा रखा, लेकिन नतीजा— ढाक के तीन पात। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के कानों पर जु तक नहीं रेंगी। शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। राहगीर ठोकरें खाते हैं, महिलाएँ डर के साए में सफर करती हैं और असामाजिक तत्वों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। फिर भी जिम्मेदार अफसर और जनप्रतिनिधि सुविधाजनक खामोशी ओढ़कर बैठे हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा— “प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा और मुखिया सोभा देवी को कई बार शिकायत की गई, लेकिन दोनों की लापरवाही अब जनता की परेशानी में बदल चुकी है।” लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही हाईमास्ट लाइट दुरुस्त नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। जनता का सवाल साफ है — क्या चैनपुर हमेशा अंधेरे में डूबा रहेगा? या फिर जिम्मेदारों के बंद कान कब खुलेंगे?

