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New Delhi : देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में सुधार को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है। शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में 8 राज्यों झारखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, राजस्थान, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्रियों, वाणिज्य कर मंत्रियों और राज्य कर अधिकारियों की अहम बैठक हुई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 3 और 4 सितंबर को होने वाली GST परिषद की बैठक से पहले GST Rate Rationalization पर साझा रणनीति तैयार करना था। केंद्र सरकार ने सुझाव दिया है कि वर्तमान में लागू 5%, 12%, 18% और 28% वाले चार स्लैब को सरल बनाकर केवल तीन स्लैब में बदला जाए। साथ ही 12% और 28% की दरों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है।
केंद्र का मानना है कि इससे कर संरचना सरल होगी और उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। लेकिन राज्यों ने स्पष्ट किया है कि यदि बिना किसी मुआवज़े (Compensation) के दरों में बदलाव किया गया, तो उन्हें राजस्व की भारी हानि झेलनी पड़ेगी।
बैठक में राज्यों ने कहा कि GST व्यवस्था लागू होने के बाद से ही उन्हें विनिर्माण (Manufacturing) से जुड़े राजस्व का नुकसान हुआ है। झारखंड जैसे औद्योगिक राज्य, जहाँ खनन और उत्पादन आधारित कर संग्रह होता था, अब राजस्व की भरपाई मुख्यतः उपभोग (Consumption) आधारित GST से होती है।
2017 में GST लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को पाँच साल तक संरक्षित राजस्व (Protected Revenue) के तहत 14% सालाना वृद्धि के हिसाब से मुआवज़ा देने की व्यवस्था की थी। यह प्रावधान जून 2022 तक लागू रहा, लेकिन उसके बाद Compensation की व्यवस्था समाप्त हो गई। इसी कारण अब राज्य राजस्व असंतुलन से जूझ रहे हैं।
राज्यों का कहना है कि यदि 12% और 28% स्लैब समाप्त होते हैं तो उन्हें लगभग 2000 करोड़ रुपये सालाना का नुकसान होगा। ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि वह किसी नए Compensation Mechanism की व्यवस्था करे, या फिर Sin & Luxury Goods पर एक अलग उपकर लगाकर राज्यों को उसका हिस्सा दे।
बैठक में तय किया गया कि 8 राज्य मिलकर एक संयुक्त ज्ञापन (Joint Memorandum) GST परिषद को सौंपेंगे। इसमें स्पष्ट रूप से मांग की जाएगी कि दरों में बदलाव से पहले राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुरक्षित रखने की ठोस व्यवस्था की जाए।
राज्यों ने दो टूक कहा कि वे दरों के सरलीकरण (Simplification) के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब राज्यों की वित्तीय स्थिरता प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी जोर दिया कि GST सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना बनी रहनी चाहिए।

