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World News: अफ्रीकी देश घाना एक बार फिर गहरे शोक में डूब गया है। गुरुवार को देश की सेना का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें दो केंद्रीय मंत्रियों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई। इस भीषण दुर्घटना को घाना सरकार ने राष्ट्रीय त्रासदी घोषित करते हुए पूरे देश में झंडे आधे झुका दिए हैं। यह घटना घाना में बीते एक दशक की सबसे गंभीर हवाई दुर्घटनाओं में गिनी जा रही है।
घटना की जानकारी देते हुए राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि हेलीकॉप्टर राजधानी अकरा से उड़ान भरकर उत्तर-पश्चिमी दिशा में स्थित अशांति क्षेत्र की ओर जा रहा था। इस क्षेत्र में स्थित ओबुआसी की सोने की खदान का दौरा करने के लिए रक्षा मंत्री एडवर्ड ओमान बोआमाह और पर्यावरण मंत्री इब्राहिम मुर्तला मुहम्मद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी हेलीकॉप्टर में सवार थे। लेकिन रास्ते में ही यह विमान रडार से गायब हो गया।
बाद में इसका मलबा घने जंगल वाले अंदासी इलाके में पाया गया। मौके पर मौजूद चश्मदीदों द्वारा बनाए गए मोबाइल फुटेज में दिख रहा है कि क्रैश के बाद हेलीकॉप्टर के हिस्से जंगल में धधकते हुए जल रहे हैं। सेना ने इस दुखद घटना की औपचारिक जांच शुरू कर दी है, हालांकि हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।
मारे गए लोगों में दो मंत्री के अलावा नेशनल डेमोक्रेटिक कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष सैमुअल सरपोंग, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुनुरू मोहम्मद और चार सदस्यीय पायलट क्रू शामिल हैं। पूरे देश में शोक की लहर फैल गई है। राजधानी अकरा स्थित रक्षा मंत्री के घर और पार्टी मुख्यालय पर शोक जताने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
राष्ट्रपति जॉन महामा ने इस घटना को ‘गहरे व्यक्तिगत आघात’ बताया है और सभी सरकारी कार्यक्रमों को तत्काल स्थगित कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री हरूना इदरीसू ने कहा कि राष्ट्रपति पूरी तरह से सदमे में हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
दुर्घटनाग्रस्त विमान Z-9 सैन्य हेलीकॉप्टर था, जिसे आमतौर पर परिवहन और मेडिकल इवाक्युएशन के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह घाना की सेना का भरोसेमंद विमान माना जाता था, लेकिन अब इसकी सुरक्षा और तकनीकी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
घाना में पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। मई 2014 में देश के तट पर एक सेवा हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 2012 में राजधानी अकरा में एक मालवाहक विमान रनवे से फिसलकर एक बस से टकरा गया था, जिसमें दस लोगों की जान गई थी।
अब सभी की नजर सेना और सरकार की उस जांच रिपोर्ट पर है, जिससे पता चलेगा कि क्या तकनीकी गड़बड़ी, खराब मौसम या मानवीय भूल इस त्रासदी की वजह बनी।

