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आम्रपाली कोल परियोजना और टेरर लिंक! अमित अग्रवाल और सुदेश केडिया पर फैसला सुरक्षित

Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुज नाथ शामिल हैं, ने बुधवार को टेरर फंडिंग से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई की। यह मामला आरोपी अमित अग्रवाल, सुदेश केडिया और अजय सिंह द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा

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Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुज नाथ शामिल हैं, ने बुधवार को टेरर फंडिंग से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई की। यह मामला आरोपी अमित अग्रवाल, सुदेश केडिया और अजय सिंह द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने आरोप गठन और उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने अमित अग्रवाल और सुदेश केडिया की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जबकि अजय सिंह की याचिका पर सुनवाई अब 5 अगस्त को होगी।

तीनों आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे आम्रपाली कोल परियोजना में काम करने के लिए मजबूरी में लेवी (रंगदारी) देते थे, क्योंकि मना करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी मिलती थी। उनका यह भी कहना है कि वे पीड़ित हैं, न कि आरोपित। उन्होंने यह भी कहा कि NIA ने बिना पर्याप्त सबूतों के उन्हें इस मामले में शामिल कर लिया।

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास और सौरभ कुमार ने अदालत को बताया कि आरोपितों ने आपसी सहमति से TPC (उग्रवादी संगठन) को धन दिया, यह जानते हुए भी कि यह राशि आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकती है। इसलिए उनकी याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।

यह मामला 2018 से जुड़ा है, जब टंडवा थाना में दर्ज प्राथमिकी को NIA ने टेकओवर किया था। जांच के दौरान NIA ने पाया कि CCL, पुलिस, उग्रवादी और शांति समिति के बीच एक गंभीर समन्वय था, जिसके तहत TPC को फंडिंग दी जा रही थी। कोल प्रोजेक्ट्स के ठेके ऊंची दरों पर इसी उद्देश्य से दिए गए थे।

NIA की जांच में कुल 21 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिनमें से ये तीन नाम प्रमुख हैं। अब सभी की नजरें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस संवेदनशील मामले की दिशा तय कर सकता है।

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