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9.27 एकड़ जमीन के मुआवजे पर फिर सुनवाई, हाईकोर्ट ने पुराना फैसला किया रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गोला अंचल के डभातु गांव में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण से जुड़े छह मामलों में निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सभी मामलों को दोबारा निचली अदालत में भेजते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के गोला अंचल के डभातु गांव में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा निर्धारण से जुड़े छह मामलों में निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सभी मामलों को दोबारा निचली अदालत में भेजते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुआवजे का नए सिरे से निर्धारण करने का आदेश दिया है।

मामला भैरवा जलाशय परियोजना के लिए डभातु गांव की करीब 9.27 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2003 में किया गया था। जमीन मालिकों ने तय मुआवजे को कम बताते हुए भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 18 के तहत आपत्ति दर्ज कराई थी।

जमीन मालिकों का कहना था कि उनकी जमीन गोला शहर से करीब एक किलोमीटर दूर है। आसपास बाजार, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, प्रखंड कार्यालय, पावर स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी सुविधाएं हैं। इसलिए जमीन की बाजार कीमत सरकारी मुआवजे से ज्यादा होनी चाहिए।

पहले भूमि अधिग्रहण न्यायालय ने वर्ष 2002 के एक पुराने मामले को आधार बनाकर 8,923 रुपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा तय किया था। इस फैसले को तत्कालीन हजारीबाग और अब रामगढ़ के उपायुक्त की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि निचली अदालत ने वर्ष 2002 के 33 भूमि सौदों का उल्लेख तो किया, लेकिन उनकी कीमत और जमीन के क्षेत्रफल का पर्याप्त विश्लेषण नहीं किया। बिक्री चार्ट और वैल्यूएशन खतियान जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर भी पर्याप्त विचार नहीं किया गया।

इन कमियों के आधार पर हाईकोर्ट ने 29 फरवरी 2012 के फैसले और 15 मार्च 2012 के अवॉर्ड को रद्द कर दिया। कोर्ट ने सभी छह मामलों को उसी भूमि अधिग्रहण न्यायालय में वापस भेज दिया है।

निचली अदालत को आदेश की प्रति मिलने की तारीख से चार महीने के भीतर सभी मामलों का फैसला करने और साक्ष्यों के आधार पर मुआवजा नए सिरे से तय करने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद कुछ दस्तावेजों के अस्पष्ट होने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि आगे से अदालत में भेजे जाने वाले दस्तावेज स्पष्ट और पढ़ने योग्य होने चाहिए।

इस आदेश के बाद जमीन मालिकों के मुआवजे की राशि पर दोबारा सुनवाई होगी और नए सिरे से फैसला लिया जाएगा।

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