फॉण्ट कनवर्टर NEW

60 हजार साल पुरानी खोज ने दुनिया को चौंकाया: आदिमानव नहीं, ‘साइंटिस्ट’ थे हमारे पूर्वज!

Johannesburg: अब तक यह माना जाता था कि आदिमानव केवल शारीरिक ताकत के बल पर पत्थरों से शिकार करता था, लेकिन एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलू-नटाल प्रांत में वैज्ञानिकों को ऐसे प्रमाण मिले

अपनी भाषा में पढ़ें

Johannesburg: अब तक यह माना जाता था कि आदिमानव केवल शारीरिक ताकत के बल पर पत्थरों से शिकार करता था, लेकिन एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलू-नटाल प्रांत में वैज्ञानिकों को ऐसे प्रमाण मिले हैं जो बताते हैं कि 60 हजार साल पहले भी इंसान वैज्ञानिक समझ और पूरी प्लानिंग के साथ शिकार करता था।

उन्नत तकनीक: ‘बूफोन डिस्टिचा’ पौधे से तैयार होता था जहर

स्वीडन और दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों की साझा रिसर्च में उम्लत्तुजाना रॉक शेल्टर की खुदाई के दौरान क्वार्ट्ज पत्थर से बने तीरों के सिरे मिले हैं। जांच में इन पर ‘बूफोन डिस्टिचा’ नामक स्थानीय पौधे के जहर के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। यह पौधा आज भी दक्षिण अफ्रीका में पाया जाता है और बेहद जहरीला माना जाता है।

शिकार की वैज्ञानिक रणनीति

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह जहर शिकार को तुरंत नहीं मारता था। यह एक सोची-समझी रणनीति थी:

  • धैर्य और योजना: जहर जानवर को धीरे-धीरे कमजोर करता था।

  • पीछा करना आसान: जहर के असर से जानवर दूर भागने में असमर्थ हो जाता था।

  • व्यवहारिक ज्ञान: शिकारी बिना अपनी जान जोखिम में डाले बड़े जानवरों को आसानी से काबू कर लेते थे।

4,000 साल नहीं, 60,000 साल पुरानी है ये तकनीक

इस खोज से पहले माना जाता था कि जहर लगे तीरों का प्रयोग महज 4,000 से 8,000 साल पहले शुरू हुआ था, जिसके प्रमाण मिस्र में मिले थे। लेकिन इन 60,000 साल पुराने अवशेषों ने साबित कर दिया है कि मानव मस्तिष्क बहुत पहले ही उन्नत तकनीक और ‘बायो-केमिकल’ समझ विकसित कर चुका था।

हैरानी की बात यह है कि हजारों सालों तक मिट्टी में दबे रहने के बावजूद जहर के अवशेष रासायनिक रूप से सुरक्षित मिले। यह खोज बताती है कि हमारे पूर्वज न केवल शिकारी थे, बल्कि वे प्रकृति और रसायनों के गहरे जानकार भी थे।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram