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मुख्य न्यायाधीश बने बीआर गवई, शपथ के बाद मां के चरण छू लिया आशीर्वाद

India News: भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर आज बुधवार सुबह न्यायमूर्ति बीआर गवई ने पदभार संभाल लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद न्यायमूर्ति गवई ने मंच पर बैठीं अपनी मां

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India News: भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर आज बुधवार सुबह न्यायमूर्ति बीआर गवई ने पदभार संभाल लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद न्यायमूर्ति गवई ने मंच पर बैठीं अपनी मां कमलताई गवई के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था, जब देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के नए प्रमुख ने अपनी सफलता का श्रेय मां को देते हुए उनके पैरों में सिर नवाया।

मंच पर मौजूद रहीं कमलताई गवई ने अपने बेटे को स्नेहपूर्वक गले लगाया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, कि मेरा बेटा आज यहां अपनी मेहनत और लगन के दम पर पहुंचा है। उन्होंने आगे कहा कि बेटे का यह मुकाम उनके लिए गर्व का पल है। शपथ ग्रहण के बाद चीफ जस्टिस गवई ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना से भी मुलाकात की।

यहां बताते चलें कि न्यायमूर्ति गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की थी। सुप्रीम कोर्ट में उन्हें 18 जनवरी 2019 को न्यायाधीश नियुक्त किया गया। अब वह करीब छह महीने तक मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं देंगे और नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त होंगे।

कौन है बीआर गवई?

न्यायमूर्ति गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ था। उनके पिता, श्री रामकृष्ण गवई, एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार तथा केरल के पूर्व राज्यपाल थे। न्यायमूर्ति गवई ने 1985 में नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की और 16 मार्च 1985 को वकालत में प्रवेश किया।

बीआर गवई का करियर

  • बॉम्बे हाई कोर्ट: न्यायमूर्ति गवई ने 14 नवंबर 2003 को बॉम्बे हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 12 नवंबर 2005 को स्थायी न्यायाधीश बने। उन्होंने मुंबई, नागपुर, और गोवा बेंच में विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की।

  • सुप्रीम कोर्ट: 24 मई 2019 को उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति में वरिष्ठता, ईमानदारी, योग्यता और न्यायपालिका में विविधता का ध्यान रखा गया।

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