Koderma news: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोक परीक्षा ( अनुचित साधन निवारण) विधेयक 2026 लाया जिसमे 10 वर्षों तक की सजा और 10 करोड तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है। यह वास्तव में सराहनीय कदम है, और आशा करते हैं कि आने वाले समय में देश के महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मामले नहीं आएंगे और उनपर अंकुश भी लगेगा। बरकट्ठा विधनसभा के वरीय नेता व समाजसेवी सुरेन्द्र भाई मोदी ने एक बयान जारी कर केन्द्र सरकार के इस निर्णय की सराहना की है ।
उन्होनें जारी अपने बयान में कहा है की
एक गंभीर विषय यह भी है कि पेपर लिक की ऐसी घटना 2024 में भी हुई थी और सरकार ने उस समय फिर से परीक्षा आयोजित भी किया था । परंतु उस घटना से कोई सबक नहीं सीखा और ना ही उस समय इस तरह के कानून को बनाने की आवश्यकता महसूस की । जिसका परिणाम यह हुआ कि बड़े पैमाने पर देश के छात्र छात्राओं युवा आज का GEN-Z और प्रबुद्ध लोगों ने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन, धरना और विरोध प्रदर्शन किया। सरकार ने प्रारंभ में इस लोकतांत्रिक आंदोलन को तव्वजो ही नही दिया फिर दमन करने का प्रयास भी किया, परंतु जब आंदोलन का स्वरूप तेज हो गया, तब सरकार की नींद खुली और फिर ऐसे विधेयक बनाए गए।
यदि प्रारंभिक समय पर ही इस पर अंकुश लगा दिये जाते , तो आज इतने भयावह रूप देखने को नहीं मिलते।
कानून तो अपना काम करेगा ही, परंतु इसमें एक और सुधार की आवश्यकता है, वह यह कि देश की महत्वपूर्ण परीक्षाएँ प्राइवेट एजेंसियों द्वारा न कराकर सरकारी एजेंसी के द्वारा ही आयोजित कराई जाए। प्राइवेट एजेंसियां पैसा कमाने के फेर में गड़बड़ करती ही हैं क्योंकि उन्हें पता है कि हम छोड़कर भाग भी सकते हैं, और जब चाहे सरकार हमको हटा देगी। परंतु सरकारी एजेंसियों के ऊपर दबाव भी रहेगा और भय में इस तरह की गड़बड़ियां नहीं करेगी।
उन्होनें अपने जारी बयान में मोदी जी व उनकी पूरी टीम को इसके लिए साधुवाद दिया है । ।




