रांची: झारखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को विश्वस्तरीय बनाने और आगामी बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मंगलवार को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ (CMSchool of Excellence) और ‘पीएमश्री’ (PM-Shri) विद्यालयों के कामकाज की गहन पड़ताल की गई।
‘शून्य विफलता’ का लक्ष्य और शिक्षकों को प्रोत्साहन
सचिव उमाशंकर सिंह ने आगामी सीबीएसई (CBSE) बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का लक्ष्य ‘शत-प्रतिशत’ परिणाम होना चाहिए। सचिव ने निर्देश दिया कि एक भी छात्र परीक्षा में अनुत्तीर्ण न हो, इसके लिए विद्यालयों में नियमित रूप से रेमिडियल (उपचारात्मक) कक्षाएं चलाई जाएं।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के लिए उन्होंने ‘पुरस्कार और दंड’ की नीति अपनाई है। जिन स्कूलों का परिणाम 100% रहेगा, उनके प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। वहीं, बोर्ड की तैयारियों में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शिक्षकों को मिली बड़ी राहत
परीक्षा की गंभीरता को देखते हुए सचिव ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 17 फरवरी तक सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के किसी भी शिक्षक को किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-teaching duties) में नहीं लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य शिक्षकों को पूरी तरह से छात्रों की पढ़ाई और उनके डाउट क्लियर करने पर केंद्रित रखना है।
पीएमश्री विद्यालयों पर पैनी नजर
बैठक में राज्य के 363 पीएमश्री विद्यालयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन स्कूलों के लिए निर्धारित 21 संकेतकों का स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने लक्ष्य दिया कि 28 फरवरी तक सभी पीएमश्री स्कूल न्यूनतम 75% स्कोर हासिल करें।
लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सचिव ने खूंटी जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और सहायक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से स्पष्टीकरण (Show-cause notice) मांगा है। गौरतलब है कि फरवरी के अंत या मार्च में केंद्रीय टीम इन स्कूलों का निरीक्षण कर सकती है, जिससे पहले राज्य स्तरीय टीम भी भ्रमण करेगी।
बैठक में राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन सहित राज्य के सभी जिलों के शिक्षा पदाधिकारी और इंजीनियर उपस्थित थे। इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड सरकार अब कागजी आंकड़ों के बजाय धरातल पर शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए संकल्पित है।



