रांची/गोड्डा: देश को रोशन करने के संकल्प के साथ अदाणी एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड ने अब युवाओं के करियर को नई ऊर्जा देने का बीड़ा उठाया है। झारखंड के गोड्डा में अदाणी पावर प्रोजेक्ट के समीप ‘लाइट इंडिया प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की गई है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण के लिए अनिवार्य हाई-टेंशन टावरों के निर्माण हेतु कुशल मैनपावर तैयार करना है।

कौशल की कमी बनेगी अवसर

आमतौर पर हम सड़कों और खेतों में बिजली के ऊंचे टावर देखते हैं, लेकिन इन्हें खड़ा करना आसान काम नहीं है। वर्तमान में देशभर में इस चुनौतीपूर्ण काम के लिए सिर्फ 600 से 650 “गैंग” (समूह) ही सक्रिय हैं, जिनमें करीब 18,000 से 20,000 लोग लगे हुए हैं। बिजली क्षेत्र में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण इस मैनपावर की मांग वर्तमान से दोगुनी है। इसी अंतर को पाटने के लिए अदाणी समूह ने अपनी इस विशेष ट्रेनिंग एकेडमी की शुरुआत की है।

जोखिम भरा काम, लेकिन शानदार कमाई

टावर लगाने का काम कोई साधारण मजदूरी नहीं है। इसमें 40 से 70 मीटर की ऊंचाई पर काम करने की विशेष दक्षता चाहिए होती है। अब तक यह हुनर पारंपरिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता था, लेकिन ‘लाइट इंडिया प्रोजेक्ट’ इसे प्रोफेशनल टच दे रहा है।

ट्रेनिंग के साथ कमाई भी

इस तीन महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें शामिल होने वाले युवाओं के रहने और खाने का पूरा खर्च कंपनी उठाती है। इसके साथ ही, प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को 21,000 रुपये प्रति माह का वजीफा (Stipend) भी दिया जाता है। ट्रेनिंग में टावर को असेंबल और डिसअसेंबल करने की बारीकियां सिखाई जाती हैं।

रोजगार की गारंटी

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद एक युवा आसानी से 30 से 35 हजार रुपये प्रति माह की कमाई कर सकता है। पहले बैच के 70 युवाओं ने अपना प्रशिक्षण पूरा कर इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली है। अदाणी समूह की योजना हर साल लगभग 1,000 लोगों को प्रशिक्षित करने की है, जिससे न केवल बिजली परियोजनाओं में तेजी आएगी, बल्कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के युवाओं के लिए आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे।

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